मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States Central Command ने दावा किया कि उसने ईरान की ताकतवर फोर्स Islamic Revolutionary Guard Corps के मुख्यालय को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। जारी वीडियो में नौसैनिक जहाजों से दागी गई मिसाइलें एक शहरी परिसर को निशाना बनाती दिखती हैं।
वॉशिंगटन ने इसे “snake’s head cut off” करार दिया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि पिछले दशकों में IRGC की गतिविधियों में हजारों अमेरिकी प्रभावित हुए, और यह कार्रवाई उसी का जवाब है।
ट्रंप का 4–5 हफ्तों का प्लान
Donald Trump ने इंटरव्यू में साफ कहा कि यह अभियान अल्पकालिक नहीं होगा। उनके अनुसार, अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति कम से कम चार से पांच हफ्ते जारी रह सकती है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गोला-बारूद और लॉजिस्टिक्स की कोई कमी नहीं है। दिलचस्प मोड़ यह है कि हमलों के बीच उन्होंने बातचीत के लिए दरवाजा खुला बताया। युद्ध और वार्ता, दोनों ट्रैक साथ चल रहे हैं।
ईरान का पलटवार, खाड़ी में अलर्ट
ईरान ने सर्वोच्च नेता की हत्या को “ऐतिहासिक अपराध” बताते हुए जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कड़ी चेतावनी दी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक IRGC ने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में सायरन गूंजने लगे।

क्षेत्र अब बहु-स्तरीय टकराव का मंच बन चुका है।
ओमान की मध्यस्थता, कूटनीति की पतली डोर
तनाव के बीच ओमान फिर से मध्यस्थ की भूमिका में दिख रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया कि यदि गंभीर पहल हो तो तेहरान तनाव घटाने को तैयार है।
यानी एक तरफ मिसाइलें, दूसरी तरफ मेज पर रखे वार्ता के कागज। दोनों की गति अलग, दिशा अलग। “सांप का सिर” जैसे बयान सुर्खियां बनाते हैं, लेकिन हर सिर के बाद नई शाखाएं उगती हैं या नहीं, यह इतिहास तय करता है। चार हफ्तों का प्लान अक्सर चार दशक की राजनीति को बदल देता है।
जंग का गणित सिर्फ मिसाइलों से नहीं, उसके बाद की स्थिरता से मापा जाता है।
Middle East Crisis का असर दुबई पर, हर दिन ₹2000 करोड़ का नुकसान
