
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब सिर्फ सफर नहीं होगा—सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी साथ चलेगी। जिस राज्य को कभी महिला सुरक्षा के सवालों पर घेरा जाता था, वहीं अब तस्वीर बदलती दिख रही है। स्टीयरिंग पर महिलाएं होंगी, सवारी भी महिलाएं—और बीच में एक नई कहानी लिखी जाएगी, जो सिर्फ परिवहन नहीं, बदलाव की रफ्तार बनेगी।
‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’—सिर्फ योजना नहीं, गेम चेंजर
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अगुवाई में शुरू हुआ ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को एक साथ टारगेट करता है। यह योजना सीधी है, लेकिन असर गहरा—महिलाएं खुद ई-रिक्शा चलाएंगी और दूसरी महिलाओं को सुरक्षित सफर देंगी।
यह मॉडल सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांवों की जमीन पर उतर रहा है।
इन जिलों से हुई शुरुआत, पूरे यूपी में विस्तार की तैयारी
इस पहल की शुरुआत अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी जैसे शहरों से हो चुकी है। अब जल्द ही Lucknow, Prayagraj, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में भी यह सेवा शुरू होने जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि यह नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैलाया जाए।
रोजगार + सुरक्षा = डबल इंजन इम्पैक्ट
इस योजना के तहत शुरुआत में 1000 ई-रिक्शा स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को दिए जा रहे हैं। अब तक 119 महिलाएं ई-रिक्शा पायलट बन चुकी हैं, 629 को ट्रेनिंग मिल चुकी है और 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं।
यह सिर्फ आंकड़े नहीं—यह उस बदलाव की झलक है, जहां महिलाएं अब ‘रोजगार लेने वाली’ नहीं, बल्कि ‘रोजगार देने वाली’ बन रही हैं।
कमाई ने बदली जिंदगी—3 लाख सालाना तक पहुंची आय
इस पहल का सबसे बड़ा असर महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। योजना से जुड़ी महिलाओं की औसत सालाना आय 3 लाख रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है। यानी जो महिलाएं कभी आर्थिक रूप से निर्भर थीं, वही अब अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं।

बेटियों का सफर अब होगा आसान और सुरक्षित
ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ी समस्या होती है—सुरक्षित परिवहन की कमी। यह योजना इस गैप को सीधे भरती है। अब स्कूल जाने वाली बेटियों को सुरक्षित सफर मिलेगा, कामकाजी महिलाओं को भरोसेमंद विकल्प मिलेगा। और सबसे अहम—ड्राइवर भी महिला, सवारी भी महिला… यानी सुरक्षा की एक नई लेयर।
गांवों में बदलेगा सामाजिक-आर्थिक ढांचा
‘सेफ मोबिलिटी’ सिर्फ सड़क पर चलने वाली योजना नहीं है—यह गांवों की सोच बदलने का मिशन है। जब महिलाएं स्टीयरिंग संभालती हैं, तो सिर्फ वाहन नहीं चलता—समाज की सोच भी आगे बढ़ती है। रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मान—तीनों एक साथ मिलकर एक नया इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं।
UP बन रहा ‘मॉडल स्टेट’?
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर अक्सर सवालों के घेरे में रहने वाला उत्तर प्रदेश अब खुद को एक मॉडल स्टेट के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
यह योजना उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जहां सरकार सिर्फ कानून नहीं बना रही, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान भी दे रही है।
यह सिर्फ ई-रिक्शा नहीं हैं… यह चलती-फिरती क्रांति है। जहां हर मोड़ पर एक महिला ड्राइवर सिर्फ सवारी नहीं, बल्कि एक संदेश लेकर चल रही है— “अब रास्ते भी हमारे, और मंजिल भी हमारी।”
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