
यूपी के राज्य मंत्री सतीश चन्द्र शर्मा ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जबरदस्त बाइक रैली निकाली। पीछे चल रहे थे अयोध्या के पूर्व सांसद लल्लू सिंह और दर्जनों-हज़ारों जोशीले युवा।
लेकिन एक सवाल सबसे बड़ा बन गया – “हेलमेट कहां है?”
देशभक्ति का जुनून सबके सिर पर था, लेकिन सिर की सुरक्षा के लिए हेलमेट किसी के पास नहीं थी।
वीडियो बना ,हेलमेट बना “गायब”
सोशल मीडिया पर इस रैली का वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
Netaji जी बाइक चला रहे हैं, पीछे झंडे, नारे और झूमते युवा। पर अफसोस, ये वीडियो किसी ISI मार्का हेलमेट कंपनी का विज्ञापन नहीं था – क्योंकि उसमें एक भी सिर पर हेलमेट नहीं था।
लगता है, HD वीडियो के लिए बाल उड़ते हुए दिखना ज़रूरी था, सुरक्षा नहीं।
पुलिस क्या करेगी?
सवाल अब UP पुलिस पर आ गया है – क्या ये महज़ “वीआईपी इग्नोरेंस” का केस बनेगा या फिर कानून सबके लिए बराबर रहेगा?
क्या पुलिस मंत्री जी को Challan भेजेगी या सिर्फ आम जनता को ही “हेलमेट नहीं पहना” पर चालान काटा जाएगा?
ट्रैफिक एक्ट में “पद और पोस्ट” के लिए कोई Exception लिखा हो तो जरूर बताइए!
हेलमेट नहीं तो राष्ट्रभक्ति अधूरी क्यों नहीं मानी जाए?
देशभक्ति का असली मतलब दूसरों को प्रेरित करना, कानून का पालन करना, और जीवन की सुरक्षा है। अगर नेता ही हेलमेट नहीं पहनेंगे, तो आम युवा कैसे सीखेंगे कि “जान है तो जहान है”?
क्या 15 अगस्त की आज़ादी, ट्रैफिक नियमों से भी मुक्त करती है?
कुछ संभावित वायरल वीडियो टाइटल्स:
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“देश के लिए सिर देना है, सिर पर हेलमेट नहीं!”
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“जब देशभक्ति, ड्राइविंग से भिड़ गई!”
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“हेलमेट – एक सेक्युलर चीज़, जो VIP को नहीं भाती!”
Viral वीडियो चाहिए या जिम्मेदारी?
वीडियो बनाना आसान है, Reel बनाना और भी आसान। पर अगर आप नेता हैं, और सार्वजनिक रैली निकाल रहे हैं, तो आप एक संदेश दे रहे हैं – या तो inspire करेंगे या misguide।
हेलमेट सिर्फ नियम नहीं, समझदारी का प्रतीक है। देशभक्ति हेलमेट के साथ और भी स्टाइलिश लगती है।

