
अमेरिकी राजनीति के स्वघोषित डील मास्टर डोनाल्ड जे. ट्रंप ने एक बार फिर अपना सुपरपावर मोड ऑन कर दिया है। व्हाइट हाउस में माइक के सामने आते ही ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी:
“अगर दो हफ्तों में शांति नहीं आई, तो रूस को टैरिफ़ टॉनिक पिलाऊंगा!”
यूक्रेन में हाल ही में एक अमेरिकन फैक्ट्री पर रूसी मिसाइल अटैक के बाद ट्रंप का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने कहा कि यह हमला उन्हें बिल्कुल “खुश नहीं” करता — और यह बात उन्होंने तीन बार दोहराई, ताकि बाकी नेताओं को भी यकीन हो जाए।
ट्रंप का मास्टरप्लान: “पुतिन-ज़ेलेंस्की बैठ जाएं, वरना मैं बैठा दूंगा!”
ट्रंप ने अपने विशेष अंदाज़ में सुझाव दिया कि यूक्रेन और रूस के नेता “एक कॉफी पर मिल लें”। उन्होंने ज़ोर देकर कहा:
“अगर वो नहीं मिले, तो मुझे देखना होगा कि वो क्यों नहीं मिले!”
क्योंकि जब ट्रंप कहते हैं “Let’s make peace”, तो शांति भी सोचती है – चलो ट्रंप की बात मान लेते हैं।
टैरिफ़ धमकी: टमाटर से लेकर टैंक तक महंगा हो सकता है सब कुछ
ट्रंप के मुताबिक़, अगर शांति नहीं होती तो वह “Big Tariffs or Big Sanctions या दोनों” लगाने जा रहे हैं। अर्थात्, रूस अगर नहीं माना, तो उसके टमाटर, स्टील, और शायद उसके इंस्टाग्राम मीम्स तक पर टैक्स लग सकता है।
यह धमकी रूस की अर्थव्यवस्था पर नहीं, पर पुतिन के इगो पर ज़रूर भारी पड़ सकती है।
ट्रंप ने यह भी कह दिया कि:
“It’s not America’s war, it’s your war!”
यानि अमेरिका अब सलाह देता रहेगा और बाकी दुनिया आपस में जूझती रहे — यानी “World Peace, the Trump Way™”.
कूटनीति हो या कंफ़्यूज़न, ट्रंप दोनों को एक जैसा निभा लेते हैं।
ज़ेलेंस्की की ट्रंप से मुलाकात और पुतिन की चुप्पी
इस चेतावनी से पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की व्हाइट हाउस पहुंचे थे और यूरोपीय नेताओं के साथ मिलकर बातचीत की थी। ट्रंप ने कहा कि वह अब पुतिन-ज़ेलेंस्की बैठक की “व्यवस्था” कर रहे हैं — बिलकुल वैसे जैसे कोई शादी में रिश्ता मिलवाता है:
“मैं चाहूंगा कि दोनों शांति की टेबल पर साथ बैठें। अगर वो नहीं बैठे, तो मुझे देखना होगा कि कुर्सियाँ क्यों खाली रहीं।”
ट्रंप का कूटनीतिक रोलरकोस्टर जारी
ट्रंप ने दावा किया कि अपने कार्यकाल में “7 युद्ध रोके और 3 संभावित युद्ध टाले”, और अब वह रूस-यूक्रेन युद्ध को भी 2 हफ्ते की डेडलाइन पर रख रहे हैं।
अब देखना ये होगा कि क्या वाकई पुतिन और ज़ेलेंस्की मिलते हैं, या फिर रूस को टैरिफ़ का तीखा स्वाद चखना पड़ेगा।
भले ही यह ट्रंप स्टाइल बयानों से भरा मामला हो, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक शांति, अर्थव्यवस्था और मानवता को काफी गहरी चोट पहुंचाई है। ऐसे में डिप्लोमेसी में चाहे जितनी ड्रामा हो — समाधान की राह सच्चे प्रयासों से ही निकलेगी।
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