
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध ठहरा दिया, लेकिन लगता है फैसला ‘सिर्फ नाम का’ था। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा, भारत को 18 प्रतिशत टैरिफ देना ही होगा।
टैरिफ रद्द होने के बावजूद स्थिति जस की तस रहेगी। कोई बदलाव नहीं होगा और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी असर नहीं पड़ेगा।
यानि सुप्रीम कोर्ट ने हुक्म तो सुना दिया, लेकिन अमेरिकन कैश रियलिटी में कुछ नहीं बदला।
मोदी और ट्रंप—दोस्त या डील मेकर?
ट्रंप ने मोदी को ‘मेरे अच्छे दोस्त, सज्जन और बुद्धिमान’ बताया। भारत के साथ 500 मिलियन डॉलर का व्यापार चल रहा है। रूस से संबंध तोड़ने पर भी भारत ने ट्रंप के अनुरोध पर कदम उठाया। यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए यह ‘सियासी शतरंज’ की चाल मानी जा रही है।
ट्रंप के हिसाब से, “भारत ने रूस से दूर होकर वेनेजुएला से तेल मंगाया। मेरा और मोदी का लक्ष्य—शांति!”
टैरिफ, युद्ध और 3 करोड़ जीवन बचाए?
ट्रंप ने दावा किया कि भारत-पाक युद्ध को रोकने में टैरिफ ने भूमिका निभाई। अगर टैरिफ 200 प्रतिशत होते, तो युद्ध अनिवार्य था। सियासत का ये ‘टैरिफ-वार’ ड्रामा सीधे न्यूज़ हेडलाइन में फिट बैठता है।

500 मिलियन डॉलर का ‘टैरिफ एक्सचेंज’
भारत और अमेरिका के बीच हुई डील टैरिफ घटाकर 18%। साथ ही अमेरिका ने भारत से आने वाले कृषि और खाद्य उत्पाद, कपड़े, चमड़े, जूते, प्लास्टिक, रबड़, मशीनरी और हस्तशिल्प पर भी रियायत दी।
सियासी गणित:
- टैरिफ घटे = डील बनी
- डील बनी = भारत खुश
- भारत खुश = ट्रंप खुश
- ट्रंप खुश = हेडलाइन हिट
टैरिफ या कोर्ट का फैसला सभी को लगता है कि ‘नाम में राम, काम में श्याम’। ट्रंप ने मज़ाकिया अंदाज में कहा, “फैसला कुछ भी कहे, डॉलर तो वैसे ही खर्च करना पड़ेगा!”
यानी, सुप्रीम कोर्ट बोले ‘अवैध’, ट्रंप बोले ‘अवैध लेकिन कलेक्ट करो’, और भारत… चुपचाप चुकाए।
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