
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टैरिफ को अवैध करार दिया, लेकिन राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे चुनौती नहीं माना। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने धमाकेदार ऐलान किया, दुनियाभर के देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा।
ट्रंप ने बताया कि यह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत होगा। यानी पहले से लगे टैरिफ के ऊपर अब ‘एक और लेयर’।
1974 ट्रेड एक्ट और 150 दिन का नियम
राष्ट्रपति ट्रंप ने समझाया कि संविधान की धारा 122 और ट्रेड ऑफ एक्ट 1974 के तहत यह टैरिफ लगाया गया। देश को व्यापार घाटा या आर्थिक संकट हो रहा हो। दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ लागू। टैरिफ 150 दिन तक लागू रहेगा, फिर समीक्षा होगी। 150 दिन बाद परिस्थितियों का आकलन कर राष्ट्रपति आगे का निर्णय लेंगे।
निक्सन और 1971
ट्रंप ने याद दिलाया कि 55 साल पहले निक्सन ने भी ऐसा ही किया था। 1971 में व्यापार असंतुलन के कारण अमेरिका घाटे में था। निर्यात कम, आयात ज्यादा। डॉलर पर दबाव, हल = 10% ग्लोबल टैरिफ। 1974 में ट्रेड एक्ट बनाकर इसे कानूनी रूप दिया गया।
अमेरिका फर्स्ट और अप्रैल 2025 से टैरिफ
ट्रंप ने अप्रैल 2025 में अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी के तहत दुनियाभर पर टैरिफ लगाया। 90 दिन की अवधि, जुलाई 2025 में टैरिफ फिर से लागू। देश-विशेष टैरिफ अलग-अलग। डील और व्यापार समझौते टैरिफ कम करने के बदले। टैरिफ पर कोर्ट में चुनौती आई, लेकिन ट्रंप ने इसे “और 10% ऊपर” का गेम बना दिया।

सुप्रीम कोर्ट बोले ‘अवैध’, ट्रंप बोले ‘अवैध? अच्छा! और 10%!’ अमेरिका की पॉलिसी: टैरिफ = पावर, टैरिफ = ड्रामा, टैरिफ = ग्लोबल फैंस।
यानी, दुनिया का हर देश अब सोच रहा होगा—“टैरिफ? पहले वाला कम था, अब नया जोड़ा!”
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