₹10 लाख में आ सकती है टोयोटा की नई Flex Fuel SUV, अब पेट्रोल नहीं एथेनॉल से दौड़ेगी कार!

नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बीच अब ऑटोमोबाइल कंपनियां वैकल्पिक ईंधन तकनीकों पर तेजी से काम कर रही हैं। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के बाद अब फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक चर्चा के केंद्र में आ गई है। इसी कड़ी में जापानी ऑटो कंपनी टोयोटा भारतीय बाजार में अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल SUV लॉन्च करने की तैयारी में जुटी है। माना जा रहा है कि यह नई SUV करीब 10 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में पेश की जा सकती है।

कम कीमत और कम ईंधन खर्च की वजह से यह SUV आम ग्राहकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है। केंद्र सरकार भी लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है, ताकि विदेशी तेल पर निर्भरता घटाई जा सके और प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। ऐसे में टोयोटा की यह नई तकनीक भारतीय ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है।

क्या है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और कैसे करती है काम?

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस तकनीक से लैस वाहन सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी चल सकते हैं। ऐसे वाहन E20, E85 और यहां तक कि E100 जैसे हाई एथेनॉल फ्यूल को भी सपोर्ट करते हैं।

एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसकी कीमत पेट्रोल की तुलना में कम होती है, जिससे वाहन चलाने का खर्च भी घट सकता है। इसके अलावा एथेनॉल आधारित ईंधन कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मददगार माना जाता है, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प है।

टोयोटा पहले भी दिखा चुकी है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक की झलक

टोयोटा इससे पहले भारत में आयोजित ऑटो एक्सपो के दौरान Innova Hycross का फ्लेक्स-फ्यूल आधारित प्रोटोटाइप पेश कर चुकी है। इसे दुनिया की पहली इलेक्ट्रिफाइड फ्लेक्स-फ्यूल कारों में शामिल माना गया था।

अब रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इसी तकनीक को ज्यादा किफायती SUV मॉडल में उतारने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि टोयोटा अपने लोकप्रिय SUV प्लेटफॉर्म पर फ्लेक्स-फ्यूल सिस्टम और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन पेश कर सकती है। इससे वाहन बेहतर माइलेज देने के साथ कम प्रदूषण भी फैलाएगा।

हाईराइडर और Fortuner में भी मिल सकती है नई तकनीक

ऑटो सेक्टर से जुड़ी कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में टोयोटा अपने अन्य लोकप्रिय मॉडलों में भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक शामिल कर सकती है। इनमें Urban Cruiser Hyryder और अगली पीढ़ी की Fortuner जैसे मॉडल शामिल हो सकते हैं।

कंपनी फिलहाल भारत में मल्टी-पावरट्रेन रणनीति पर काम कर रही है। यानी टोयोटा सिर्फ एक तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल जैसे कई विकल्पों को एक साथ आगे बढ़ा रही है, ताकि ग्राहकों को उनकी जरूरत और बजट के हिसाब से विकल्प मिल सकें।

सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग मिशन को मिलेगा बड़ा समर्थन

भारत सरकार लगातार एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाना है। इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा और किसानों को भी सीधा फायदा मिल सकता है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसी वजह से अब कई ऑटो कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। इससे पहले मारुति सुजुकी भी इस तकनीक पर काम करने की बात कह चुकी है। ऐसे में टोयोटा की एंट्री से इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के सामने अभी क्या हैं चुनौतियां?

हालांकि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के कई फायदे हैं, लेकिन भारत में इसे बड़े स्तर पर अपनाने के लिए अभी कई चुनौतियां मौजूद हैं। फिलहाल देश में E85 और E100 जैसे हाई एथेनॉल फ्यूल की उपलब्धता बेहद सीमित है। अधिकांश पेट्रोल पंपों पर अभी केवल E20 फ्यूल ही उपलब्ध है।

इसके अलावा इस तकनीक के लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में विशेष बदलाव करने पड़ते हैं, जिससे शुरुआती लागत बढ़ सकती है। हालांकि कंपनियां लगातार कोशिश कर रही हैं कि इन वाहनों की कीमत आम ग्राहकों की पहुंच में रखी जा सके।

ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले समय में एथेनॉल फ्यूल की सप्लाई मजबूत होती है और कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भारत में पेट्रोल और डीजल का बड़ा और सस्ता विकल्प बन सकते हैं।

 

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