राम मंदिर को पहली बार मिलेगा सीईओ, तीन साल के कार्यकाल के लिए आवेदन शुरू; अयोध्या में रहना होगा अनिवार्य

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इस पद के लिए गठित चयन समिति ने पात्रता की शर्तें तय करते हुए इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है। चयनित अधिकारी का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और उसे पूरे कार्यकाल के दौरान अयोध्या में रहकर जिम्मेदारियां निभानी होंगी।

समिति की हालिया बैठक में सीईओ पद के लिए योग्यता, अनुभव और चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। तय मानकों के अनुसार आवेदक का हिंदू धर्म का अनुयायी होना आवश्यक होगा। साथ ही उम्मीदवार के पास स्नातक की डिग्री और प्रशासन अथवा वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

एक महीने में चयन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य

सूत्रों के अनुसार, आवेदन प्राप्त करने के लिए एक समर्पित ईमेल आईडी बनाई जा रही है। आवेदन मिलने के बाद समिति पहले उनकी प्रारंभिक जांच करेगी, फिर योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर बातचीत के बाद अंतिम चयन किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया अगले एक महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। चयन प्रक्रिया के संचालन के लिए एक सचिव नियुक्त करने का भी फैसला लिया गया है।

13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित है सुनवाई

इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दायर याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। याचिकाओं में ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। यह मामला पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

ट्रस्ट सदस्य ने दावों का किया खंडन

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने ट्रस्ट से जुड़े कुछ दावों का खंडन करते हुए कहा कि वीआईपी दर्शन पास की व्यवस्था पहले की तरह ही जारी है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।

उन्होंने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

एसआईटी जांच के बीच बढ़ा सीईओ नियुक्ति का महत्व

कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जारी है। इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गर्म है। ऐसे समय में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पहले सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नियुक्त होने वाला अधिकारी मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न विकास परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।

 

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