लखनऊ: अलीगंज के पुरनिया इलाके में सोमवार को हुआ भीषण अग्निकांड कई परिवारों की दुनिया उजाड़ गया। दोपहर तक जिन बच्चों को माता-पिता बेहतर भविष्य के सपनों के साथ पढ़ने भेजकर आए थे, शाम होते-होते वही परिवार अस्पतालों और घटनास्थल के बाहर अपनों की तलाश में बिलखते नजर आए। हादसे के बाद का दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
बताया जा रहा है कि जिस समय आग लगी, उस वक्त ‘लर्निंग स्पेस लाइब्रेरी’ में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। आग लगते ही अंदर अफरा-तफरी मच गई। छात्रों ने शोर मचाया, बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन तेजी से फैलती आग और धुएं ने कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। कई छात्रों को सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिल सका।
कुछ ही मिनटों में मौत के जाल में बदल गई लाइब्रेरी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर करीब तीन बजे आग लगने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। निचली मंजिल से उठती भीषण लपटों और घने धुएं के कारण ऊपर मौजूद छात्रों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया।
जानकारी के अनुसार, कुछ छात्रों ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगाई और किसी तरह बाहर निकल सके। वहीं कई छात्र अंदर ही फंस गए। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन कई जिंदगियां नहीं बच सकीं।
मां-पिता की आंखों के सामने टूट गए सपने
घटनास्थल और अस्पतालों के बाहर जो दृश्य दिखाई दिए, उन्होंने पूरे शहर को भावुक कर दिया। अपने बच्चों की तलाश में भटकते माता-पिता, रोती हुई बहनें और बेसुध परिजन हर किसी को झकझोर रहे थे।
कई परिवारों को आखिरी बार अपने बच्चों के मोबाइल फोन से मदद की गुहार वाले संदेश मिले। कोई अपने माता-पिता को फोन कर बचाने की अपील कर रहा था तो कोई बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा था। लेकिन हालात इतने भयावह थे कि परिजन चाहकर भी कुछ नहीं कर सके।
फायर फाइटर्स ने जोखिम उठाकर चलाया रेस्क्यू
दमकल कर्मियों और बचाव दल के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग की लपटों के बीच प्रवेश कर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। बचावकर्मी लगातार इमारत के भीतर जाकर फंसे लोगों की तलाश करते रहे।
जैसे ही किसी व्यक्ति को बाहर लाया जाता, वहां मौजूद परिजनों की निगाहें उसकी ओर दौड़ पड़तीं। हर किसी को उम्मीद थी कि शायद उनका अपना सुरक्षित मिल जाए। लेकिन कई बार यह उम्मीद कुछ ही पलों में मातम में बदल जाती थी।
जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज
हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिला। स्थानीय लोगों और परिजनों ने सवाल उठाए कि आखिर ऐसी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कौन करता है। कई लोगों ने भवन प्रबंधन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाता और समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।
जांच के दायरे में आएंगे सभी पहलू
प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आग लगने के कारणों, भवन की संरचना, अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच की जा रही है। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे ने न केवल कई परिवारों के सपने छीन लिए, बल्कि शहर के सामने सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
