“11 जिंदगियां खत्म!” ठाणे में रफ्तार बनी मौत, वैन के उड़े परखच्चे

संजीव पॉल
संजीव पॉल

Thane में सोमवार की सुबह एक ऐसा मंजर लेकर आई, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। कल्याण-मुरबाद हाईवे पर तेज रफ्तार वैन और सीमेंट मिक्सर की टक्कर में 11 लोगों की जान चली गई। सड़क पर बिखरे मलबे, चीखते लोग और खामोश होते शरीर—यह सिर्फ हादसा नहीं, एक ऐसी त्रासदी थी जिसने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। यह हादसा नहीं… रफ्तार का कहर था।

कहां और कैसे हुआ हादसा

यह दर्दनाक टक्कर कल्याण-मुरबाद राष्ट्रीय राजमार्ग 61 पर मुरबाद के गोविली गांव के पास रायता पुल पर सुबह करीब 11:30 बजे हुई। चश्मदीदों के मुताबिक, वैन तेज रफ्तार में थी और सीमेंट मिक्सर से सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और आसपास अफरा-तफरी मच गई। एक पल की रफ्तार… जिंदगीभर का सन्नाटा छोड़ गई।

वैन में फंसी जिंदगियां

हादसे के बाद सबसे दर्दनाक दृश्य वैन के अंदर था, जहां यात्री बुरी तरह फंस गए थे। कोई मदद के लिए चिल्ला रहा था, कोई बेहोश पड़ा था। स्थानीय लोग सबसे पहले मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर रेस्क्यू शुरू किया। शीशे तोड़े गए, दरवाजे खींचे गए, लेकिन हर किसी को बचाना संभव नहीं था। कुछ लोग बाहर आ गए… कुछ वहीं हमेशा के लिए रुक गए।

रेस्क्यू ऑपरेशन और अस्पताल की जंग

सूचना मिलते ही पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल भेजा गया। पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बाकी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर उनकी जान बचाने की कोशिश में जुटे हैं। अस्पताल में भी जिंदगी और मौत की लड़ाई जारी है।

हादसे की वजह क्या?

शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं सीमेंट मिक्सर का ड्राइवर नशे में तो नहीं था या फिर वाहन में कोई तकनीकी खराबी तो नहीं थी। सच्चाई अभी जांच के दायरे में है। सवाल कई हैं… जवाब अभी भी अधूरे हैं।

गुजरात में भी मौत का तांडव

इसी बीच Surendranagar से भी एक और दर्दनाक खबर आई, जहां तेज रफ्तार ट्रक ने पैदल जा रहे तीर्थयात्रियों को कुचल दिया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 4 महिलाएं शामिल हैं। हादसे के बाद ट्रक चालक फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। सड़कें अब सफर नहीं… खतरे का दूसरा नाम बनती जा रही हैं।

आखिर कब रुकेगा ये सिलसिला?

लगातार हो रहे ऐसे हादसे एक बड़ी चिंता की ओर इशारा करते हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की अनदेखी हर दिन नई जिंदगियां छीन रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक हम ऐसे ही हादसों को खबर बनाकर भूलते रहेंगे?  जब तक डर नहीं बदलेगा… हादसे नहीं रुकेंगे।

सड़क या मौत का मैदान?

आज ठाणे, कल कोई और शहर—कहानी वही रहती है। हादसे सिर्फ आंकड़ों में बदल जाते हैं, लेकिन पीछे छूट जाते हैं टूटे हुए परिवार और अधूरी जिंदगियां। हम सड़क पर गाड़ी नहीं चला रहे… किस्मत चला रहे हैं।

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