
अप्रैल में खाली हो रही तेलंगाना की दो राज्यसभा सीटें अब साधारण चुनाव नहीं रहीं। K. Chandrashekar Rao ने ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी Bharat Rashtra Samithi कम से कम एक उम्मीदवार उतारेगी।
कांग्रेस को उम्मीद थी कि मुकाबला आसान रहेगा, लेकिन केसीआर ने खेल को अचानक रोमांचक बना दिया है। अब यह लड़ाई सिर्फ संख्या बल की नहीं, प्रतिष्ठा की भी है।
विधानसभा का गणित: 41 का जादुई आंकड़ा
तेलंगाना विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। BRS के पास 37 विधायक होने का दावा है, हालांकि 10 विधायक बागी होकर कांग्रेस में जा चुके हैं और उनकी अयोग्यता पर मामला लंबित है।
अगर सभी विधायक साथ रहे, तो BRS को सिर्फ 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। यहीं से शुरू होता है बैक-चैनल संवाद और रणनीतिक जोड़-घटाव।
AIMIM और BJP: किंगमेकर या साइलेंट स्पेक्टेटर?
राज्य में All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के 7 विधायक हैं, जबकि Bharatiya Janata Party के पास 8। यदि समीकरण बदले, तो दूसरी सीट पर मुकाबला कांटे का हो सकता है। कांग्रेस के पास 66 विधायक और CPI का एक समर्थन है। पहली सीट लगभग सुरक्षित मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट अब ‘टेढ़ी खीर’ की श्रेणी में प्रवेश कर चुकी है।
नामों की गूंज और अंदरूनी हलचल
कांग्रेस की ओर से Abhishek Manu Singhvi को दोबारा भेजने की चर्चा है। दूसरी सीट के लिए वी. नरेंद्र रेड्डी और जस्टिस सुदर्शन रेड्डी जैसे नाम भी हवा में तैर रहे हैं।

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी आंतरिक खींचतान को साध पाएगी? राजनीति में अंकगणित जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है अनुशासन।
Reputation Politics
केसीआर का यह कदम केवल सीट जीतने की कोशिश नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक मौजूदगी का संकेत भी है। हैदराबाद की गलियों से लेकर दिल्ली की गलियारों तक संदेश साफ है BRS अभी भी खेल में है।
यह चुनाव गठबंधन, गणित और टाइमिंग की परीक्षा बन चुका है। और सियासत की इस बिसात पर हर चाल कैमरे की रोशनी में है।
घंटों का जाम खत्म, 55 मिनट में दिल्ली – मेरठ की रफ्तार हुई नमो!
