
तनाव या Tension को हम अक्सर “दिमाग की बात” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि stress हमारे सोचने, समझने, महसूस करने और बर्ताव करने के तरीके को quietly hijack कर लेता है।
कई बार शरीर पहले signal देता है, और दिमाग बाद में समझ पाता है कि “अरे… ये बीमारी नहीं, टेंशन है!”
खतरनाक टेंशन के लक्षण (Tanav Ke Lakshan)
अगर ये symptoms बार-बार दिखें, तो समझ जाइए body help मांग रही है- हाथ-पैर अचानक ठंडे पड़ जाना। शरीर में अजीब सा खिंचाव या बेचैनी। मुंह बार-बार सूखना। धुंधला दिखना या आंखों पर प्रेशर। कानों में आवाजें या रिंगिंग। कभी बहुत गर्मी, कभी बहुत ठंड लगना। सांस लेने में भारीपन। लगातार सिरदर्द। दिल की धड़कन तेज होना। बार-बार वॉशरूम जाना। पेट खराब रहना। निगलने में दिक्कत। शरीर में सुन्नपन। जरूरत से ज्यादा पसीना। नींद टूटना, sleep quality खराब होना।
Reports normal होती हैं, problem stress निकलता है।
Stress आपका Behavior कैसे बदल देता है
बहुत ज्यादा टेंशन लेने वाले व्यक्ति में ये बदलाव आम हैं Decision लेने में confusion, चीजें याद रखने में दिक्कत। Focus zero हो जाना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन। अपनों पर ही झुंझलाहट निकाल देना। कई बार stress में लोग दांत भींचते हैं, जबड़ा कस लेते हैं, बार-बार त्वचा खुरचते हैं।
और उन्हें पता भी नहीं चलता कि ये सब silent anxiety reactions हैं।
आदतें भी बिगाड़ देता है तनाव
Stress में इंसान या तो “बस खाते ही रहो” मोड में चला जाता है या “भूख ही मर गई” फेज में।
कई लोग इसी दौरान Smoking, Alcohol, Over-shopping, Social isolation, Exercise से दूरी जैसी आदतों में फंस जाते हैं। कुछ तो बात-बात पर रोने भी लगते हैं — बिना वजह नहीं, overload की वजह से।
Tension कम करने के Practical तरीके
Stress control कोई rocket science नहीं, consistency का खेल है।

Active Lifestyle अपनाएं
Exercise, dance, walk — जो भी पसंद हो, बस body को move कराइए।
बात करना जरूरी है
Family और friends से खुलकर बात करें। Half stress वहीं dissolve हो जाता है।
खानपान सुधारे
Balanced diet = stable मूड। Junk food stress को और amplify करता है।
Me-Time को guilty pleasure न बनाएं
Music, podcast, cooking, reading जो अच्छा लगे, वो करें।
Problem से भागें नहीं
Problem solve करें, avoid नहीं। Challenges face करने से ही stress छोटा पड़ता है।
अगर शरीर बार-बार signal दे रहा है, तो ignore मत कीजिए। Stress weakness नहीं, warning system है और सही समय पर सुना गया stress, बड़ी बीमारी बनने से रुक सकता है।
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