वृंदावन की गलियों में भक्ति का संगीत अक्सर गूंजता है, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है. कोई कीर्तन नहीं, कोई रासलीला नहीं… बल्कि एक किताब ने हलचल मचा दी है. ‘परम सुख’—नाम सुनते ही लगता है जैसे जीवन का कोई सीक्रेट कोड मिल गया हो. और जब यह किताब उस संत पर हो जिसने 13 साल की उम्र में घर छोड़कर भगवान की तलाश को अपना करियर बना लिया, तो कहानी अपने आप ‘ट्रेंडिंग’ बन जाती है. कौन हैं स्वामी प्रेमानंद जी? कानपुर के एक साधारण परिवार से निकले…
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हीरो नहीं, जिम्मेदार इंसान बनो बेटा!
कभी कहा जाता था “बेटी को संभालकर रखो”, अब समझदार लोग कहते हैं “बेटे को समझदार बनाओ।” समाज evolve हो रहा है। ऐसे में एक पिता की भूमिका सिर्फ कमाने वाले की नहीं, बल्कि character builder की भी है। बेटे को यह सिखाना जरूरी है कि ताकत का मतलब दबाना नहीं, संभालना होता है। 1. Respect is the Real Power सबसे पहली नसीहत Respect सबके लिए। चाहे दोस्त हो, सहपाठी हो, colleague हो या partner। Consent क्या होता है, boundaries क्या होती हैं ये बातें घर से ही शुरू होती हैं। हीरो वही…
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