श्रीहरिकोटा: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में शनिवार, 18 जुलाई 2026 एक नई उपलब्धि दर्ज करने जा रहा है। देश की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले पूर्ण स्वदेशी ऑर्बिटल श्रेणी के रॉकेट ‘विक्रम-1’ की पहली परीक्षण उड़ान भरने जा रही है। ‘मिशन आगमन’ के तहत होने वाला यह प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया ऑर्बिटल रॉकेट भारतीय धरती से अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरेगा। इस मिशन के साथ कई…
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अब NASA-ISRO मिलकर देखेंगे धरती का हाल — NISAR ने संभाला मोर्चा
अब धरती की हर हलचल — चाहे भूकंप हो, ग्लेशियर पिघलें या जंगल सिमटें — सबका डेटा अब ISRO और NASA की जोड़ी के पास जाएगा! 7 नवंबर 2025 से NISAR Satellite ने आधिकारिक रूप से काम शुरू कर दिया है।30 जुलाई को श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ यह मिशन अब धरती का डिजिटल सीसीटीवी कैमरा बन चुका है। क्या है NISAR? — “दो देशों की, एक मिशन कहानी” NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) एक जॉइंट प्रोजेक्ट है — जहां भारत ने लगाया S-बैंड रडार, और अमेरिका ने जोड़ा L-बैंड रडार।…
Read MoreNISAR मिशन: लॉन्च से पहले जानिए इसकी कीमत, मकसद और टेक्नोलॉजी
NASA और ISRO का संयुक्त प्रोजेक्ट NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar), पृथ्वी की निगरानी के लिए बनाया गया दुनिया का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी रडार सैटेलाइट है। इसका मकसद पृथ्वी की सतह की हाई-रिज़ॉल्यूशन मैपिंग और पर्यावरणीय बदलावों की बारीक निगरानी करना है। लॉन्च डेट: 30 जुलाई 2025स्थान: सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटारॉकेट: GSLV-F16ऑर्बिट: LEO (747 किलोमीटर ऊंचाई) कितना खर्चा आया इस पर? कुल लागत: $1.5 बिलियन (लगभग ₹13,000 करोड़) — दुनिया का सबसे महंगा Earth-Imaging Satellite NASA का योगदान: एल-बैंड रडार GPS रिसीवर हाई-डेटा कम्युनिकेशन सॉलिड-स्टेट रिकॉर्डर ISRO का योगदान: सैटेलाइट…
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