एक गिरफ्तारी… और देश की सड़कों पर उबलता गुस्सा। ये सिर्फ एक नेता की हिरासत नहीं, किसानों के आत्मसम्मान पर चोट बन गई। और अब सवाल ये है… क्या ये आग फिर से पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगी? खुर्जा की सड़कों पर जो गूंज रहा था, वो सिर्फ नारे नहीं थे… वो एक चेतावनी थी। एक ऐसी चेतावनी, जिसे अगर अनसुना किया गया… तो हालात फिर 2020 जैसे हो सकते हैं। गिरफ्तारी या चिंगारी? ओडिशा में किसान नेता राकेश टिकैत को हिरासत में लिया गया… और जैसे…
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