गोरखपुर की सुबह आम दिनों की तरह ही शुरू हुई थी. हल्की धूप, सन्नाटा, और कुछ लोग मॉर्निंग वॉक पर. लेकिन कुछ ही मिनटों में यह शांति चीखों में बदल गई. पूर्व पार्षद राजकुमार चौहान… जो रोज की तरह टहलने निकले थे…उन्हें नहीं पता था कि आज रास्ते में चार साए उनका इंतजार कर रहे हैं. यह हमला अचानक नहीं था. यह इंतजार किया गया… प्लान किया गया… और बेरहमी से अंजाम दिया गया. गोलियां, चाकू और 100 मीटर की जंग प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने उन्हें घेर लिया. पहले गोली चली… फिर…
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