इस्लामाबाद की चमचमाती सड़कों के पीछे एक ऐसा अंधेरा फैल चुका है, जिसे आंकड़ों में मापा नहीं जा सकता—लेकिन हर खाली प्लेट, हर बुझती चूल्हा और हर थकी आंख उसे चीख-चीख कर बता रही है। IMF के अरबों डॉलर के पैकेज के बावजूद पाकिस्तान आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां “कर्ज” भी इलाज नहीं, बल्कि लक्षण बन चुका है। सवाल सीधा है—क्या ये सिर्फ आर्थिक संकट है, या एक पूरे सिस्टम का धीमा पतन? IMF की बैसाखी भी टूटी, गरीबी का विस्फोट पाकिस्तान ने 2025 में IMF से भारी…
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