वृंदावन की गलियों में भक्ति का संगीत अक्सर गूंजता है, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है. कोई कीर्तन नहीं, कोई रासलीला नहीं… बल्कि एक किताब ने हलचल मचा दी है. ‘परम सुख’—नाम सुनते ही लगता है जैसे जीवन का कोई सीक्रेट कोड मिल गया हो. और जब यह किताब उस संत पर हो जिसने 13 साल की उम्र में घर छोड़कर भगवान की तलाश को अपना करियर बना लिया, तो कहानी अपने आप ‘ट्रेंडिंग’ बन जाती है. कौन हैं स्वामी प्रेमानंद जी? कानपुर के एक साधारण परिवार से निकले…
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