“अजीब दास्तां है ये…” – मीना कुमारी ने स्क्रीन पर मोहब्बत को अमर बना दिया

1960 का दशक — जब सिनेमा में इमोशन, शालीनता और संगीत का स्वर्ण युग था। इसी दौर में आई किशोर साहू की क्लासिक ड्रामा फिल्म ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, जहां राजकुमार का गंभीर चेहरा, मीना कुमारी की नम आँखें और नादिरा की जलन भरी मुस्कान ने मोहब्बत को एक मेडिकल मेटाफर में बदल दिया। कहानी — जब ड्यूटी और दिल में हुआ टकराव डॉ. सुशील वर्मा (राजकुमार) एक सर्जन हैं, जो अपने परिवार और जिम्मेदारियों में उलझे हैं। उनकी जिंदगी में आती है करुणा (मीना कुमारी) — एक नर्स…

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रेट्रो रिव्यू : ‘बिन फेरे हम तेरे’ – शादी के बिना भी पूरी ज़िंदगी का साथ

आशा पारेख ने जमुना के किरदार में ऐसा जान डाल दिया है कि लगेगा कि आपके मोहल्ले की कोई “कठिन ज़माने की औरत” बोल रही है।बेच दी गई, बंधक बनाई गई, और फिर भी बिना शादी के एक आदमी और उसके बच्चों की ज़िम्मेदारी उठाई — जमुना संघर्ष की चलता-फिरता प्रतीक बन जाती हैं। रिश्तों का मेलोड्रामा: शादी नहीं, पर संस्कार पूरे! जमुना और जगदीश शर्मा (राजेंद्र कुमार) का रिश्ता बिना शादी के पति-पत्नी जैसा दिखाया गया है। ये फिल्म 70s की होते हुए भी एक “लिव-इन विद सेंटीमेंट्स” वाला…

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