हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने वाला मदर्स डे महज़ एक तारीख नहीं, बल्कि उस अमर प्रेम का उत्सव है, जिसे शब्दों में पिरोना नामुमकिन है।माँ, जिसने हमें चलना सिखाया, बोलना सिखाया, जीवन की ठोकरों से पहले गिरकर खुद सीखा और हमें बचा लिया। भारत का जवाबी हमला: पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक स्ट्राइक माँ: पहली गुरु, पहला दोस्त और पहला भगवान जब हम बोल नहीं सकते थे, वो हमारी आँखों में भाव पढ़ लेती थी।जब हम गिरते थे, वो अपने आँचल में समेट लेती थी।और…
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