‘मालदार एकलौता दूल्हा’ चाहिए, पर सास नहीं! रिश्तों के बाजार में नई डिमांड

एक मित्र घर आए। चेहरे पर गंभीरता, आवाज़ में मिठास और दिमाग में कैलकुलेटर। बोले—“बहन के लिए लड़का देखना है… मालदार हो, एकलौता हो।” हमने सोचा ठीक है, आजकल ‘स्टार्टअप पिच’ की तरह रिश्ते भी प्रेजेंट होते हैं। लेकिन असली पंचलाइन तो बाद में आई“और अगर घर में सिर्फ बाप हो तो और भी अच्छा रहेगा… सास होगी तो दिनभर खून पीएगी।” इतना कहते हुए वो हंस रहे थे। और सामने बैठी उनकी पत्नी मतलब भाभी जी के चेहरे के भाव कह रहे थे, “बेटा, आज घर चल… theory और practical…

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