1960 में आई फिल्म “बरसात की रात” वो फिल्म है जिसमें मोहब्बत, कव्वाली, ग़रीबी, अमीरी, और पापा की ना — सब कुछ था। और बारिश तो सिर्फ़ बहाना था… असली तुफ़ान तो अमन की शायरी और शबनम की निगाहों में था। बरसात के बहाने बेमौसम रोमांस अमान (भारत भूषण) है एक बेरोज़गार लेकिन बेइंतिहा टैलेंटेड उर्दू शायर। शबनम (मधुबाला) है एक रईस, जो उसकी शायरी की फैन है — बिना देखे ही आशिक़ हो जाती है। फिर आती है… एक तूफ़ानी बरसात की रात, जब दोनों मिलते हैं और मोहब्बत…
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