लखनऊ की सुबह उस वक्त सन्नाटे में बदल गई, जब एक किराए के कमरे से निकली एक खबर ने रिश्तों की हकीकत को चीरकर रख दिया। प्यार, भरोसा और साथ जीने-मरने की कसमें—सब कुछ खून के धब्बों में तब्दील हो गया। 20 साल की अलिशा बानो, जो अपने सपनों के साथ लिव-इन रिलेशन में थी, अब सिर्फ एक केस फाइल बनकर रह गई है। सवाल सिर्फ मौत का नहीं है—सवाल है उस खामोश हिंसा का, जो चार दीवारों के अंदर पनपती रही और आखिरकार जान ले गई। क्या है पूरा…
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