दुनिया की राजनीति में कुछ फैसले प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू होते हैं, और उनका असर पीढ़ियों तक गूंजता है। पिछले दो दशकों में अमेरिका ने आतंकवाद, सुरक्षा और मानवाधिकारों के नाम पर कई सैन्य हस्तक्षेप किए। हर बार वजहें स्पष्ट और नैतिक लगती थीं, लेकिन ज़मीन पर तस्वीर अक्सर जटिल निकली। कहीं सरकार गिरी, कहीं व्यवस्था टूटी, कहीं लोकतंत्र की उम्मीद आई तो कहीं अराजकता ने जड़ें जमा लीं। अब जब नजरें ईरान पर टिकी हैं, सवाल फिर वही है क्या सैन्य दबाव से स्थिरता आती है या भू-राजनीतिक समीकरण…
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