गुरुवार की सुबह भारतीय बाजार में ऐसा सन्नाटा था जैसे किसी ने अचानक अर्थव्यवस्था की अलार्म बेल बजा दी हो।मिडिल ईस्ट के समंदर में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने भारतीय रुपये को सीधे उस ढलान पर धकेल दिया, जहां से वापस चढ़ना आसान नहीं होता। डॉलर के मुकाबले रुपया 92 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। निवेशकों के चेहरों पर चिंता और बाजार में बेचैनी साफ दिख रही थी। यह सिर्फ एक करेंसी का गिरना नहीं है। यह उस आर्थिक तूफान की शुरुआती हवा…
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दुनिया की नजरें Middle East पर, जेब पर असर भारत में
Middle East में अमेरिका और इजराइल की ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई ने ग्लोबल टेंशन बढ़ा दिया है। एक आम निवेशक के लिए सवाल साफ है क्या अब पोर्टफोलियो संभालें या पैनिक बटन दबाएँ? सच्चाई यह है कि युद्ध सिर्फ बॉर्डर पर नहीं होता, उसका असर किचन और कैंडलस्टिक चार्ट दोनों पर दिखता है। कच्चा तेल: असली गेम चेंजर ईरान और खाड़ी देश ऊर्जा सप्लाई के अहम खिलाड़ी हैं। सप्लाई चेन में जरा सी रुकावट, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल उछल जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा…
Read MoreGold नहीं Gold Flake के रेट ने बिगाड़ दिया Budget! धुआँधार दर्द
गोल्ड के रेट बढ़े तो न्यूज़ चैनल चिल्लाते हैं, शादी वाले माथा पकड़ लेते हैं और आम आदमी कहता है—“ठीक है, अगली पीढ़ी खरीदेगी।” लेकिन साहेब… Gold Flake के रेट बढ़ गए तो सीधा दिल पर हमला होता है। अब फिक्र को अगर धुएँ में उड़ाया, तो घर का बजट राख हो जाएगा महंगाई का असली टेस्ट यहीं होता है सोने का भाव बढ़े—तो चर्चा। पेट्रोल महंगा—तो बहस। लेकिन जब सिगरेट के दाम बढ़ते हैं न, तब आदमी खुद से सवाल करता है “आज टेंशन ज्यादा है या जेब पतली?”…
Read Moreगुस्ताखी माफ़! महंगाई इतनी बढ़ी कि 100 में नहीं, अब 112 में आती है पुलिस!
100 नंबर गया… अब 112 डायल करिए, लेकिन Balance Check कर लीजिए! एक ज़माना था जब किसी भी खतरे में लोग बोलते थे – “जल्दी से 100 नंबर लगाओ!” अब वही लोग कहते हैं – “भाई, 112 ही लगाना, 100 तो महंगाई में फेल हो गया!” लगता है जैसे इमरजेंसी नंबर भी इस देश की मंहगाई को झेल नहीं पाया और खुद का अपग्रेडेशन करवा लिया। प्याज़ इतना महंगा कि काटो तो आँखों से आँसू नहीं, EMI निकलती है! महंगाई का लेवल अब इतना “Pro Max” हो गया है कि ₹100…
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