पहली चिंगारी सैलरी की थी… लेकिन आग पूरे सिस्टम में लग गई। नोएडा के फेज-2 में जो हुआ, वो सिर्फ विरोध नहीं था—ये भूख और हताशा का विस्फोट था। और सबसे खतरनाक सवाल ये है… क्या ये सिर्फ शुरुआत है? दूसरी तरफ, ये कहानी सिर्फ कुछ मजदूरों की नहीं है—ये उस हर इंसान की है, जो महीने के अंत में अपने ही पैसे के लिए भीख मांगता है। क्योंकि जब पेट खाली होता है, तो लोकतंत्र भी कमज़ोर लगने लगता है। विरोध से हिंसा तक: कब बिगड़ा खेल? शुरुआत बेहद…
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