1960 में आई फिल्म “बरसात की रात” वो फिल्म है जिसमें मोहब्बत, कव्वाली, ग़रीबी, अमीरी, और पापा की ना — सब कुछ था। और बारिश तो सिर्फ़ बहाना था… असली तुफ़ान तो अमन की शायरी और शबनम की निगाहों में था। बरसात के बहाने बेमौसम रोमांस अमान (भारत भूषण) है एक बेरोज़गार लेकिन बेइंतिहा टैलेंटेड उर्दू शायर। शबनम (मधुबाला) है एक रईस, जो उसकी शायरी की फैन है — बिना देखे ही आशिक़ हो जाती है। फिर आती है… एक तूफ़ानी बरसात की रात, जब दोनों मिलते हैं और मोहब्बत…
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रेट्रो रिव्यू-राज कुमार ने क्लास ली, डैनी ने प्लॉट किया – ये ‘बुलन्दी’ है बॉस!
साल था 1980। जनता टीवी के बजाय सिनेमा हॉल में “क्लास” लेती थी और रंजीत सिंह लोबो जैसे लोग बच्चों को पढ़ाई से ज़्यादा साज़िशें सिखाते थे। निर्देशक इस्माईल श्रॉफ की ‘बुलन्दी’ ऐसी ही क्लासिक कहानी है जिसमें राज कुमार का संवाद और डैनी का ड्यूल रोल — दोनों ही ‘सिलेबस’ से बाहर हैं। प्लॉट: गुरु और गुंडों का गहन गठबंधन प्रोफेसर सतीश खुराना (राज कुमार) एक आदर्शवादी शिक्षक हैं जिन्हें पढ़ाना है मनजीत सिंह लोबो (डैनी डेन्जोंगपा) को, जो इतने बिगड़े हुए हैं कि Netflix भी उसे कास्ट करने…
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