जब बाप बना विलेन और बेटा बना इंसाफ: ‘जल्लाद’ ने 90s सिनेमा हिला दिया

90 के दशक की उन फिल्मों में से एक ‘जल्लाद’ सिर्फ एक action-revenge drama नहीं है, बल्कि यह उस दौर की political hypocrisy और moral decay का कड़वा सिनेमाई आईना है।TLV प्रसाद के निर्देशन में बनी यह bilingual फिल्म (Hindi-Bengali) दर्शकों को एक ऐसा सवाल थमा देती है, जिसका जवाब आसान नहीं— अगर गुनहगार खुद आपका पिता हो, तो इंसाफ किसे कहा जाए? Kranti Kumar: Duty पहले, Blood बाद में क्रांति कुमार एक ऐसा police officer है जो किताबों में लिखे आदर्शों से बाहर निकलकर उन्हें जीता है। South India…

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