1971 की इस क्लासिक फिल्म में धर्मेन्द्र ने किया है ऐसा अभिनय, मानो जैकी चैन और दिलीप कुमार की आत्मा एक साथ घुस आई हो।नायक अजीत पहले चोर है, फिर खेतों में मेहनती मज़दूर, फिर आशा पारेख, और फिर आखिरकार राइफल वाला रॉबिनहुड। विनोद खन्ना अपने खलनायकी के करियर की शानदार शुरुआत करते हैं, और ऐसा लगता है जैसे वो कह रहे हों – “गब्बर आने वाला है, लेकिन तब तक मैं ही काफी हूँ।” रोमांस: खेतों में प्यार, बैकग्राउंड में बख्शी अंजू (आशा पारेख) और अजीत की लव स्टोरी…
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