1960 का दशक — जब सिनेमा में इमोशन, शालीनता और संगीत का स्वर्ण युग था। इसी दौर में आई किशोर साहू की क्लासिक ड्रामा फिल्म ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, जहां राजकुमार का गंभीर चेहरा, मीना कुमारी की नम आँखें और नादिरा की जलन भरी मुस्कान ने मोहब्बत को एक मेडिकल मेटाफर में बदल दिया। कहानी — जब ड्यूटी और दिल में हुआ टकराव डॉ. सुशील वर्मा (राजकुमार) एक सर्जन हैं, जो अपने परिवार और जिम्मेदारियों में उलझे हैं। उनकी जिंदगी में आती है करुणा (मीना कुमारी) — एक नर्स…
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मूवी रिव्यू “बरसात की रात” – जब बारिश से ज़्यादा अमन की शायरी में पानी था
1960 में आई फिल्म “बरसात की रात” वो फिल्म है जिसमें मोहब्बत, कव्वाली, ग़रीबी, अमीरी, और पापा की ना — सब कुछ था। और बारिश तो सिर्फ़ बहाना था… असली तुफ़ान तो अमन की शायरी और शबनम की निगाहों में था। बरसात के बहाने बेमौसम रोमांस अमान (भारत भूषण) है एक बेरोज़गार लेकिन बेइंतिहा टैलेंटेड उर्दू शायर। शबनम (मधुबाला) है एक रईस, जो उसकी शायरी की फैन है — बिना देखे ही आशिक़ हो जाती है। फिर आती है… एक तूफ़ानी बरसात की रात, जब दोनों मिलते हैं और मोहब्बत…
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