भारत में बहसें अक्सर मुद्दों पर नहीं, targets पर चलती हैं। हर दौर में एक ऐसा समुदाय चाहिए होता है, जिसे दोषी ठहराकर बाकी समाज को नैतिक सुकून दिया जा सके। कभी यह भूमिका किसी और के हिस्से आती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से Brahmin community एक convenient soft target बनती जा रही है। यह कहना किसी और की पीड़ा को नकारना नहीं है। यह सिर्फ इतना बताने की कोशिश है कि न्याय selective नहीं हो सकता। Social Media से Ground Reality तक आज social media खोलिए, memes, reels,…
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