Bodoland Territorial Region… यह सिर्फ एक भूगोल नहीं, बल्कि असम की राजनीति का वो ‘साइलेंट वॉरज़ोन’ है, जहां हर चुनाव एक संघर्ष की कहानी लिखता है। ब्रह्मपुत्र के उत्तरी किनारे पर बसा यह इलाका आज फिर सुर्खियों में है—क्योंकि यहां की 15 सीटें तय करेंगी कि असम की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। जब पूरा देश बड़े-बड़े मुद्दों में उलझा होता है, तब बोडोलैंड अपनी अलग राजनीति लिखता है—जहां जातीय पहचान, स्वायत्तता और जमीन का सवाल सीधे वोट में बदल जाता है। इतिहास का जख्म, जो आज भी वोट बनता…
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असम में कुर्सियों की कुश्ती! चुनाव से पहले NDA में सीटों की खींचतान
असम की राजनीति में चुनाव से पहले कुर्सियों की गणित तेज हो गई है. मंच पर भले ही गठबंधन की मुस्कान दिखाई दे रही हो, लेकिन पर्दे के पीछे सीटों की गिनती ऐसे हो रही है जैसे शादी में मिठाई के डिब्बे बंट रहे हों. मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma विकास का एजेंडा लेकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, मगर असली परीक्षा चुनावी भाषण नहीं बल्कि सहयोगियों की महत्वाकांक्षाओं को मैनेज करना बन गई है. गठबंधन की राजनीति: दोस्ती में भी सीटों का हिसाब असम में एनडीए का गठबंधन…
Read More“फूलों के बाग़ में काँटे न चुनें — इमाम काउंसिल का वोटर गाइड!”
बोडोलैंड में राजनीतिक तापमान एक बार फिर उबाल पर है, और इस बार बर्तन हिलाया है बोडोलैंड इमाम काउंसिल ने! काउंसिल के अध्यक्ष हाफ़िज़ कटुबुद्दीन ने BJP और AIUDF को सीधे-सीधे ‘सांप्रदायिक ताकतें’ घोषित करते हुए अल्पसंख्यक समुदाय से इन पार्टियों को तौबा करने की अपील कर दी। कटुबुद्दीन साहब ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारत एक खूबसूरत फूलों का बाग़ है, लेकिन कुछ पार्टियाँ इसमें आग लगाने पर तुली हैं। कमल और चाँद अब बगीचे के लायक नहीं!” बोलिए, बाग़ में बहार लानी है या बारूद? अल्पसंख्यकों को दिया…
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