नई दिल्ली: देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप चलाना, रात की पाली में काम करना और सप्ताहांत में सोने-जागने का समय बदल देना अब आम दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। लेकिन अनियमित जीवनशैली शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है। इसका असर केवल नींद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हृदय, मस्तिष्क, पाचन, चयापचय और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक सोने-जागने का समय लगातार बदलते रहने से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ पारिवारिक जीवन और आपसी संबंध भी प्रभावित…
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