जब सिस्टम से ज़्यादा सॉलिड था हीरो का घूंसा – Loha (1987) रेट्रो रिव्यू

1980 के दशक का बॉलीवुड आज की तरह PR-driven नहीं, Punch-driven था। राज एन सिप्पी द्वारा निर्देशित “Loha” (1987) उसी दौर की फिल्म है जहाँ कहानी में पसीना, डायलॉग में आग और सिस्टम पर सीधा वार दिखता है। यह सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं थी — यह भ्रष्ट राजनीति, लाचार सिस्टम और अकेले ईमानदार अफसर की चीख थी। सिस्टम बिक गया, बंदूक सस्ती हो गई मुंबई का ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर अमर (Dharmendra) — जो वर्दी को नौकरी नहीं, जिम्मेदारी मानता है। जब वह भ्रष्ट नेता जगन्नाथ प्रसाद (Kader Khan) को गिरफ्तार…

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बेटे की मौत और दादा बना डॉन: ‘विधाता’ की ऐसी कथा, जो सिनेमा को थर्रा दे!

1982 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘विधाता’ में बदले की भूख ऐसी थी कि दिलीप कुमार जैसे शांत अभिनेता भी गन उठा बैठे। हाँ, ये कोई माफिया गेम का कैरेक्टर नहीं, बल्कि शुद्ध देसी बुजुर्ग हैं — जो पोते को दूध भी पिलाते हैं और दुश्मनों को मौत भी। डायरेक्टर: सुभाष घईकास्ट: दिलीप कुमार, संजय दत्त, अमरीश पुरी, पद्मिनी कोल्हापुरे, संजीव कुमार, शम्मी कपूरसंगीत: कल्याणजी-आनंदजी ‘बाबा’ का बदला और ‘पोते’ की मोहब्बत शमशेर सिंह (दिलीप कुमार) एक सीधे-सादे किसान हैं। उनके बेटे प्रताप (सुरेश ओबेरॉय) को ईमानदारी की कीमत अपनी जान देकर…

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