उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की तारीख तो तय है – 9 सितंबर। लेकिन उससे पहले ही सियासत में बवाल तय है। इस बार मुकाबला सिर्फ इंडिया बनाम NDA नहीं है, बल्कि ‘राज्यीय अस्मिता’ बनाम ‘राजनीतिक गठबंधन’ भी है। सवाल ये नहीं कि कौन जीतेगा, सवाल ये है कि चंद्रबाबू नायडू और एमके स्टालिन किसे जिताना चाहेंगे, और क्यों? साउथ बनाम साउथ: जब चुनाव हो गया क्षेत्रीय pride का मुकाबला इंडिया गठबंधन ने मैदान में उतारे रिटायर्ड जज बी. सुदर्शन रेड्डी, मूलतः तेलंगाना (पुराना आंध्र) से। एनडीए ने चुना अनुभवी गवर्नर और…
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चुनाव फिरू आ गइले… अबकी विकास चखनी कि फिर से जाति के पकौड़ी?
बिहार, जेकरा के बुद्ध-बोधगया से जानल जाला, अब अपराध आ अफसरशाही के नया नाम बन गइल बा। अस्पताल में मर्डर, सड़क पर अपहरण, आ विधानसभा में हो रहल “विकास विकास” के शोर। 2025 के चुनाव में बवाल तय बा। अब देखे के बा कि जनता के वोट दिमाग से आई कि दिल से। शिक्षा के पतंग – केकरा हाथे ऊँच उड़ल? लालू-राबड़ी के जमाना (1990-2005): भैया, ऊ जमाना में स्कूल रहे – मास्टर ना। पढ़ाई रहे – कुर्सी पर नेता। ‘चारवाहा विद्यालय’ के नाम पर स्कूल खोलल गइल, बाकिर रजिस्टर…
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