कभी-कभी ज़िंदगी की सबसे भारी चुप्पी वो होती है, जो एक बेटे और पिता के बीच खामोशी से बैठती है।कहने को तो हम कहते हैं – “पापा मेरे हीरो हैं”, लेकिन हर बेटा उस हीरो के सामने खुद को एक अधूरी स्क्रिप्ट जैसा महसूस करता है। ये कहानी है एक ऐसे बेटे की जो अपने पापा जैसा बनना तो चाहता था, लेकिन ना आदतें मिल सकीं, ना रास्ते। हर दिन ये सोचकर जिया कि शायद “मैं उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा…” और आज… एक बेटे का दिल भर आया…
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