कल से शुरू होगा चातुर्मास! 119 दिन तक पाताल लोक में विश्राम करेंगे भगवान विष्णु, जानिए क्यों रुक जाते हैं सभी मांगलिक कार्य

नई दिल्ली: सनातन धर्म में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी तिथि से चातुर्मास का आरंभ होता है। वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को पड़ रही है और इसी दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके साथ ही 119 दिनों तक विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। देवउठनी एकादशी, जो इस वर्ष 20 नवंबर को है, उसी दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ शुभ कार्य…

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देवशयनी एकादशी: जब भगवान विष्णु सो जाते हैं और चातुर्मास शुरू होता है

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं, और चार महीनों तक यहीं विश्राम करते हैं। यह दिन चातुर्मास की शुरुआत का प्रतीक होता है — एक ऐसा काल जिसमें धार्मिक, वैवाहिक और मांगलिक कार्यों पर विराम लगा होता है। पौराणिक कथाओं, धार्मिक परंपराओं और वैज्ञानिक तथ्यों के संदर्भ में यह एकादशी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लखनऊ की अजादारी: मोहर्रम की परंपरा, इतिहास और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संगम पौराणिक पृष्ठभूमि: वामन अवतार और राजा…

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