
गुजरात के सूरत से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खोल दी है। ₹21 करोड़ की लागत से बनी 11 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी, उद्घाटन से पहले ही टेस्टिंग के दौरान ढह गई।
यह हादसा सूरत के ताड़केश्वर गांव में उस वक्त हुआ जब जल आपूर्ति विभाग टंकी की water load testing कर रहा था।
9 लाख लीटर पानी और ढह गया पूरा ढांचा
जानकारी के मुताबिक, टंकी में जैसे ही 9 लाख लीटर पानी भरा गया। पूरा स्ट्रक्चर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। मलबे में दबकर तीन मजदूर घायल हो गए। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन सवाल बेहद गंभीर हैं।
₹21 करोड़ की टंकी, घटिया क्वालिटी या खुला भ्रष्टाचार?
उद्घाटन से ठीक पहले हुई यह घटना सीधे इशारा करती है घटिया निर्माण सामग्री, कमजोर डिज़ाइन, और संभावित भ्रष्टाचार। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी भारी भरकम रकम खर्च होने के बावजूद टंकी का पहली ही टेस्टिंग में गिर जाना सिस्टम फेलियर का सबूत है।
Congress का BJP पर हमला
कांग्रेस ने इस घटना का वीडियो X (Twitter) पर शेयर करते हुए बीजेपी को घेर लिया। पोस्ट में लिखा- “एक तरफ कांग्रेस काल की 70 साल पुरानी टंकी को JCB से गिराया जा रहा है, दूसरी तरफ BJP शासन में नई टंकी खुद गिर पड़ी!”
यह तुलना सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।
CR Patil का क्षेत्र, सवाल और गहरे
यह घटना दक्षिण गुजरात में हुई — वही इलाका जो केंद्रीय जलशक्ति मंत्री और नवसारी सांसद C.R. Patil का क्षेत्र माना जाता है। सूरत की यह तस्वीर गुजरात के उस Infrastructure Model पर सवाल उठा रही है, जिसे अक्सर देश के सामने उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता है।

Action Taken: इंजीनियर सस्पेंड, FIR दर्ज
प्रशासन ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए:
- 2 Executive Engineers
- 1 Junior Engineer को निलंबित कर दिया
- सभी के खिलाफ FIR दर्ज की गई
जांच जारी है, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि जिम्मेदारी सिर्फ इंजीनियरों की होगी या ऊपर तक जाएगी?
जनता का पानी, सिस्टम की रेत
जिस टंकी का मकसद था प्यास बुझाना, वही टंकी बन गई भ्रष्टाचार की प्रतीक।
सवाल सीधा है — अगर पानी की टंकी भी भरोसा नहीं झेल पा रही, तो सिस्टम कैसे टिकेगा?
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