“हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट क्यों नहीं मांग सकते?” — SC में Stray Dogs पर ह्यूमर

शकील सैफी
शकील सैफी

एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि उनके इलाके में बहुत सारे आवारा कुत्ते हैं, जो पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं। “मुझे नींद की बीमारी है और मेरे बच्चे पढ़ नहीं पाते। अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन उन्होंने सिर्फ वैक्सीनेशन और स्टेरिलाइजेशन का ही जवाब दिया।”

याचिकाकर्ता ने NHRC को भी लिखा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ABC नियम के तहत कुत्तों को स्टेरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन के लिए ही पकड़ा जा सकता है, जबकि BNS कहता है कि अगर परेशानी हो रही है, तो स्थानीय अधिकारी कुत्तों को हटा सकते हैं।

एडवोकेट प्रशांत भूषण का सुझाव

भूषण ने कहा कि दुनिया भर में माना गया है कि असरदार नसबंदी सिस्टम होना चाहिए। जयपुर, गोवा जैसे शहरों में यह सिस्टम काम कर चुका है। अधिकांश शहरों में स्टेरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन प्रभावी नहीं है। इससे कुत्तों की आक्रामकता कम होती है।

भूषण ने कहा कि यह सिस्टम पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए। लोग बिना स्टेरिलाइज्ड कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें। शिकायत रिकॉर्ड हो और कोई जिम्मेदार अथॉरिटी कार्रवाई करे।

जस्टिस मेहता का व्यंग्य

प्रशांत भूषण के सुझाव पर जस्टिस मेहता ने कहा, “हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते?”

यह हल्का-सा व्यंग्य था, लेकिन गंभीर सामाजिक संदेश भी था।

पूर्व टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण

भूषण ने कोर्ट की पिछली टिप्पणियों का जिक्र किया, जहां कुत्तों के काटने पर फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया गया। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया: “यह व्यंग्य नहीं था, हम इसे बहुत गंभीरता से कहा थे।”

आवारा कुत्तों की समस्या शहरों में गंभीर है। स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन को प्रभावी बनाने की आवश्यकता। पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम के बिना समाधान मुश्किल।

कोर्ट ने हल्के-फुल्के व्यंग्य में भी यह संदेश दिया कि नियम के साथ-साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।

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