FIR का आदेश दिया, कुर्सी बदल दी? संभल हिंसा केस में जज का ट्रांसफर चर्चा में

अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले ने अब न्यायपालिका बनाम पुलिस प्रशासन का रूप ले लिया है।
ASP Anuj Chaudhary और Inspector Anuj Tomar समेत करीब 20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का अचानक तबादला कर दिया गया है।

उन्हें संभल से सुल्तानपुर ट्रांसफर किया गया है—और यही फैसला अब सवालों के घेरे में है।

क्यों अहम था CJM का आदेश?

CJM विभांशु सुधीर ने संभल हिंसा में घायल युवक आलम के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की भूमिका पर गंभीर टिप्पणियां की थीं।

कोर्ट ने साफ कहा था कि “प्रथम दृष्टया पुलिस की कार्रवाई जांच के दायरे में आती है” और नामजद अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह आदेश पुलिस महकमे के लिए किसी झटके से कम नहीं था।

पुलिस का पलटवार: FIR से इनकार

कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद संभल SP कृष्ण कुमार बिश्नोई मीडिया के सामने आए और साफ कहा— पुलिस फिलहाल FIR दर्ज नहीं करेगी। आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के तहत कार्रवाई की थी।

यहीं से मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि संस्थागत टकराव का बन गया।

तबादला और टाइमिंग: सबसे बड़ा सवाल

CJM विभांशु सुधीर का तबादला ऐसे वक्त में हुआ जब मामला हाई-प्रोफाइल बन चुका था। पुलिस और अदालत आमने-सामने थीं। FIR का आदेश सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन गया था।

हालांकि प्रशासन इसे रूटीन ट्रांसफर बता रहा है, लेकिन टाइमिंग ने शक को जन्म दिया है

कई लोग पूछ रहे हैं क्या सख्त आदेश देना ही तबादले की वजह बना?

न्याय या नोटिफिकेशन?

संभल हिंसा पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा है। ऐसे में केस सुनने वाले जज का अचानक ट्रांसफर पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह और कठिन कर सकता है। अब सवाल यह नहीं कि आदेश सही था या गलत— सवाल यह है कि क्या सिस्टम में सख्ती की कीमत चुकानी पड़ती है?

अब आगे क्या?

  • मामला अब High Court में जाएगा
  • पुलिस की भूमिका पर अंतिम फैसला ऊपरी अदालतें करेंगी
  • पीड़ित परिवार की लड़ाई लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंसती दिख रही है

यह केस आने वाले दिनों में UP की law & order politics का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

संभल में हिंसा की जांच अभी अधूरी है, लेकिन ट्रांसफर की फाइल पूरी रफ्तार में दौड़ गई। यहां लाठी-चार्ज की जांच सुस्त है, पर कुर्सी-चार्ज में देरी नहीं होती।

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