
खेत में पसीना बहाने वाले पिता… और किताबों में डूबा बेटा लखीमपुर के सचिन वर्मा ने UPSC में ऐसी बाज़ी मारी कि पूरा जिला गर्व से सीना चौड़ा कर रहा है।
लखीमपुर खीरी की धौरहरा तहसील के एक साधारण गांव में पले-बढ़े सचिन वर्मा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। यहां खेतों में मेहनत करते पिता और घर संभालती मां के बीच एक सपना पल रहा था सरकारी अफसर बनने का सपना।
पिता जगदीश वर्मा पेशे से किसान हैं और मां रामादेवी गृहिणी। घर में पैसे भले सीमित थे, लेकिन उम्मीदें बड़ी थीं। सचिन के पिता अक्सर कहते थे, “हम खेत जोतेंगे, तुम किताबें जोतो।” और सचिन ने सच में किताबों की जमीन पर मेहनत की फसल उगा दी।
AIR 785: लाखों उम्मीदवारों के बीच चमकी मेहनत
UPSC परीक्षा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों युवा इसमें किस्मत आजमाते हैं, लेकिन अंतिम सूची में वही पहुंचते हैं जिनके पास धैर्य, रणनीति और अनुशासन होता है।
सचिन वर्मा ने UPSC 2025 में AIR 785 हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत की कोई जाति या पृष्ठभूमि नहीं होती। लखीमपुर में जब रिजल्ट की खबर पहुंची तो गांव की गलियों में चर्चा सिर्फ एक नाम की थी “सचिन अफसर बन गया!”
लखनऊ पब्लिक स्कूल से शुरू हुआ सफर
सचिन की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ पब्लिक स्कूल, लखीमपुर शाखा से हुई। उन्होंने 2017 में यहां से इंटरमीडिएट पास किया। स्कूल प्रशासन ने उनकी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे विद्यालय के लिए गर्व का क्षण है।
विद्यालय के चेयरमैन डॉ. एस.पी. सिंह, पूर्व एमएलसी कांति सिंह और प्रबंध निदेशक सुशील सिंह ने भी उन्हें शुभकामनाएं भेजीं।

सफलता का फॉर्मूला: परिवार + अनुशासन + धैर्य
सचिन वर्मा अपनी सफलता का श्रेय किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट या शॉर्टकट को नहीं देते। उनका साफ कहना है कि इस उपलब्धि की असली ताकत तीन चीजें थीं माता-पिता का त्याग। शिक्षकों का मार्गदर्शन। लगातार मेहनत।
सचिन कहते हैं, “अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो तो गांव का लड़का भी देश की सबसे बड़ी परीक्षा जीत सकता है।”
युवाओं के लिए एक सीधा संदेश
सचिन की कहानी सिर्फ एक UPSC रिजल्ट नहीं है। यह उस मानसिकता पर तमाचा है जो मानती है कि बड़े सपने सिर्फ बड़े शहरों में पूरे होते हैं। लखीमपुर के इस किसान बेटे ने बता दिया IAS बनने के लिए दिल्ली का पता जरूरी नहीं, जिद और मेहनत जरूरी है।
अब गांव के कई छात्र सचिन को देखकर कह रहे हैं “अगर वो कर सकता है, तो हम क्यों नहीं?”
भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की छूट- कितनी है तेल की भूख?
