
मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ मिसाइलों से नहीं, खुफिया खेल से भी लड़ी जा रही है। वॉशिंगटन में अलार्म बज गया जब अमेरिकी एजेंसियों को शक हुआ कि रूस, ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की रियल-टाइम इंटेलिजेंस दे रहा है।
बस फिर क्या था. व्हाइट हाउस में माहौल गर्म हुआ और राष्ट्रपति Donald Trump ने तुरंत संदेश भेज दिया.
मैसेज साफ था, मॉस्को, तेहरान से दूरी रखो।
रूस की ‘खुफिया मदद’ से बढ़ी अमेरिकी बेचैनी
अमेरिकी खुफिया तंत्र को जो जानकारी मिली, उसने रणनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी. सूत्रों के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसे डेटा दिए जिससे उसे अमेरिकी सैन्य ठिकानों की गतिविधियों की जानकारी मिल सकी. इसी वजह से ईरानी हमले कई जगह असामान्य रूप से सटीक माने जा रहे हैं.
हालांकि मॉस्को खुलकर युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन वॉशिंगटन को शक है कि पर्दे के पीछे रूस का हाथ खेल बदल सकता है.
ट्रंप की मौजूदगी में रूस को भेजा गया संदेश
मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff के जरिए रूस को कड़ा संदेश दिया गया. अमेरिकी पक्ष ने कहा कि रूस किसी भी तरह की टारगेटिंग जानकारी या सैन्य सहायता ईरान को न दे.
व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो अमेरिका को कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं।

पुतिन की रणनीति और पुराना रूस-ईरान गठजोड़
रूस और ईरान का रिश्ता नया नहीं है. रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए तेहरान एक अहम रणनीतिक पार्टनर बना हुआ है. खासकर तब से जब रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है. रिपोर्ट्स के अनुसार रूस को ईरान से ड्रोन और मिसाइल तकनीक मिलती रही है.
यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद मॉस्को अक्सर तेहरान के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है.
अमेरिका को डर क्यों लग रहा है
अगर रूस खुले तौर पर नहीं भी उतरा, तब भी उसकी खुफिया मदद युद्ध का संतुलन बदल सकती है. अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस और चीन दोनों ने अप्रत्यक्ष रूप से ईरान को समर्थन दिया, तो मिडिल ईस्ट की यह जंग क्षेत्रीय संघर्ष से वैश्विक टकराव में बदल सकती है. और यही वह संभावना है जिससे वॉशिंगटन सबसे ज्यादा चिंतित है.
जंग का अगला अध्याय
मिडिल ईस्ट की यह लड़ाई अब सिर्फ ईरान और उसके विरोधियों की नहीं रही. यह धीरे-धीरे सुपरपावर शतरंज का खेल बनती जा रही है.
एक तरफ अमेरिका है. दूसरी तरफ रूस और चीन का रणनीतिक साया. और इस शतरंज की बिसात पर अगली चाल किसकी होगी, यह पूरी दुनिया की निगाहों में है.
मिडिल ईस्ट में मिसाइलें बरस रहीं… और पाकिस्तान ने चाल चल दी!
