
देश में इन दिनों सिर्फ सड़कें, स्टेशन या जिलों के नाम ही नहीं बदल रहे— अब बारी आ गई है राजभवनों और पीएम कार्यालय (PMO) की!
केंद्र सरकार ने राजभवनों के नाम बदलकर “लोक भवन” और “लोक निवास” करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सबसे बड़ा बदलाव—सेंट्रल विस्टा के तहत बने नए PMO का नाम अब ‘सेवातीर्थ’ रख दिया गया है।
यानी, पहले PMO था, फिर New PMO आया और अब… PMO नहीं, सेवातीर्थ बोलो भाई!
किन राज्यों में नाम बदल चुके हैं?
अब तक 8 राज्यों में नाम बदलने की प्रक्रिया लागू हो चुकी है—
- पश्चिम बंगाल (कोलकाता + दार्जिलिंग)
- गुजरात
- तमिलनाडु
- त्रिपुरा
- केरल
- ओडिशा
- असम
- उत्तराखंड (देहरादून + नैनीताल)
इसके अलावा, लद्दाख के उपराज्यपाल आवास का नाम अब ‘लोक निवास’ कर दिया गया है।
सरकार ने नाम क्यों बदले? (The “Official” Explanation)
सरकार का तर्क है कि ‘राजभवन’ नाम औपनिवेशिक मानसिकता दिखाता है— राजा, रियासत, राजसी छाया… और अंग्रेज़ी काल की विरासत।
इसलिए अब—राजभवन → लोक भवन
राज निवास → लोक निवास
PMO परिसर → सेवातीर्थ

यानी नाम भले बदले, काम वही रहेंगे… पर पब्लिक को लगेगा नया नया सा।
“नाम बदलो अभियान: अगला नंबर किसका?”
देखिए, नाम बदलने से समस्या हल हो या न हो… कन्फ्यूजन ज़रूर हल्का बढ़ जाता है।
कई लोग मज़ाक में कहने लगे— “जिस रफ़्तार से नाम बदले जा रहे हैं, कहीं मोबाइल में Contact List भी अपडेट करने का आदेश न आ जाए!”
तो कुछ बोले—“PMO का नाम सेवातीर्थ… अच्छा है! अब फ़ाइलें भी ‘तीर्थ यात्रा’ पर जाएँगी।”
राजनीति में नाम बदलना नया ट्रेंड नहीं, लेकिन इस बार पैमाना काफ़ी ऑल-इंडिया लेवल का है।
असर क्या पड़ेगा? (Impact Analysis in Simple Words)
- सरकारी दस्तावेज़ अपडेट होंगे
- नई नेमप्लेट, बोर्ड और साइनेज लगेंगे
- ऑफिशियल लेटर्स में नया उल्लेख आएगा
- पब्लिक को नया नाम याद करने में थोड़ा टाइम लगेगा
- राजनीति में बहस ज़रूर बढ़ेगी
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