अनुराग शुक्ला
लोकतांत्रिक परंपरा की याद
एक वाकया 11 जून 2014 का है। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज थी और ये मनमोहन सरकार की लोकसभा का आखिरी दिन था- सुषमा स्वराज ने भाषण दिया था – “ मैं बहुत प्यार से कह रही हूं मेरे भाई कमलनाथ अपनी शरारत से इस सदन को उलझा देते थे और आदरणीय शिंदे जी अपनी शराफत से उसे सुलझा देते हैं और इस शरारत और शराफत के बीच बैठी हुई सोनिया जी की मध्यस्थता आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सौम्यता आपकी सहनशीलता और आडवानी जी की न्याय प्रियता के कारण यह सदन चल सका।”
उन्होंने इसी भाषण में आगे कहा था “भारतीय लोकतंत्र के मूल में एक भाव है और वो भाव क्या है वो भाव यह है कि हम एक दूसरे के विरोधी हैं मगर शत्रु नहीं और हम विरोध करते हैं विचारधारा के आधार पर हम विरोध करते हैं नीतियों के आधार पर हम विरोध करते हैं कार्यक्रमों के आधार पर अलग-अलग है खिलाफी विचारधारा है अलग-अलग नीतियां बनाती है सरकार अलग-अलग कार्यक्रम बनाती है उस पर हम आलोचना करते हैं व आलोचना प्रखर भी होती है लेकिन प्रखर से प्रखर आलोचना भी भारतीय लोकतंत्र में एक दूसरे के व्यक्तिगत संबंधों में आड़े नहीं आती है।” इस भाषण को पक्ष विपक्ष के साथ पूरे देश ने सराहा था।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य और आचरण पर सवाल
वहीं इन दिनों राहुल गांधी मुद्दे उठाते हैं पर, भटक जाते हैं। अहं पर अटक जाते हैं। उनकी अंगभाषा को देखकर लगता है कि वो ये बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि कांग्रेस के अलावा कोई और दल सरकार कैसे चला सकता है। उनकी अंग भाषा में सत्ताधारी दल के लिए, पीएम के लिए एक तिरस्कार दिखता है। वो अहं ब्रह्मास्मि की मुद्रा में दिखते हैं।
“अहं ब्रह्मास्मि” की व्याख्या
“अहं ब्रह्मास्मि” श्लोक बृहदारण्यक उपनिषद से लिया गया है, इस का अर्थ है “मैं ब्रह्म हूँ”। यह वाक्य अहंकार का नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है। ‘अहं’ का अर्थ यहाँ सीमित ‘मैं’ (ego) से नहीं, बल्कि उस शुद्ध ज्ञान से है जो ज्ञान की अग्नि में अज्ञान को नष्ट कर देता है।
2 फरवरी 2026: लोकसभा विवाद
नेता प्रतिपक्ष की गरिमामयी कुर्सी की शोभा बढ़ा रहे राहुल गांधी को शायद “अहं ब्रह्मास्मि” को गलत अर्थों में समझा दिया गया है। 2 फरवरी 2026 को लोकसभा में राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से उद्धरण देने की कोशिश की। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने इसे गलत बताया, अनुमति मांगने की बात की तो राहुल गांधी भड़क गए। अप्रकाशित दस्तावेज उद्धरण पर बहस करते हैं। ये काम नियम 349 का उल्लंघन माना गया क्योंकि सदन में अप्रकाशित सामग्री उद्धृत नहीं की जा सकती। इस किताब को लेकर बहुत विवाद हुआ। इतना विवाद हुआ कि संसद के कई दिन इसकी भेंट चढ़ गए। मुद्दे नहीं उठे, दिखा तो अंह का प्रदर्शन, बेबाक, बेवजह, बेधड़क और बेजरूरत।
सदन में हंगामा और निलंबन
इसके बाद जब सदन शुरु हुआ और नेता प्रतिपक्ष ने सदन में भाषण दिया, तो उनके भाषण के दौरान कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर की ओर कागज फेंके, जिससे हंगामा हुआ और 6-8 सांसद सस्पेंड हो गए। नेता प्रतिपक्ष जब बोलते हैं तो नेता सदन भी बैठ जाते हैं, उनकी पार्टी के नेता कागज नहीं उड़ाते। पर सयंम पर अहं भारी दिखा।
10-11 फरवरी का विवादित वीडियो
ये दृश्य देश की सबसे बड़ी पंचायत में आम नहीं है, ये राज्य की विधानसभाओं में अकसर देखे जाते हैं। फिर कुछ ऐसे दृश्य भी दिखे, ऐसी घटनाएं हुईं जो कभी नहीं होती हैं। सांसद पीएम की सीट घेरते हैं, पीएम संसद में वक्तव्य नहीं देते, मोशन पास हो जाता है।

नेता प्रतिपक्ष जब 8 फरवरी 2026 को स्पीकर चैंबर से “कमिटमेंट” का दावा किया, पूछा “बोलने देंगे या नहीं?” एक तरह से चुनौती दी। इसी तरह एक दृश्य जो पहले नहीं दिखा था वो था 10-11 फरवरी 2026 का एक वीडियो। सरकार ने इसे जारी कर दावा किया कि इस दिन 20-25 कांग्रेस सांसदों स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में जबरन प्रवेश कर अभद्र भाषा का उपयोग किया और अवैध वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं। आक्रामक मुद्रा अपनाते हैं जो पहले कभी नहीं देखी गई।
व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति
अपने भाषण में उन्होंने मंत्री हरदीप पुरी पर एपिस्टीन से संबंध का दावा किया। राहुल गांधी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी पर “देश बेचने” जैसे व्यक्तिगत आरोप लगाए। राहुल ने कहा कि पीएम मोदी ने “भारत को बेच दिया” और यह “1.5 अरब भारतीयों का आत्मसमर्पण” है, बिना प्रमाण या पूर्व सूचना के।
राजनीतिक प्रयोग और इमेज ब्रांडिंग
दरअसल राहुल गांधी अपने राजनीतिक अवतार को सिद्ध करने के लिए लगातार इंप्रोवाइज करते हैं। कभी अपनी ही सरकार का पारित बिल सदन के बाहर फाड़ देते हैं, कभी रैलियों में सादे कागज को बिल बताकर फाड़ते हैं, कभी ठंड में टीशर्ट पहनकर माचो बनने की कोशिश करते हैं। कभी नरेगा के मजदूर के साथ मिट्टी उठाने लगते हैं। कभी राफेल पर ऐसे आरोप लगाते हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट खारिज कर देता है, कभी चौकीदार चोर है के नारे लगाते हैं।
राहुल गांधी इन दिनों पीएम मोदी पर व्यक्तिगत आरोप के फार्मूले को अपना रहे हैं। शायद उनके इमेज ब्रांडिंग करने वालों ने इसे मोदी के व्यक्तिगत के सामने खड़े रहने का तरीका बताया है, पर उन्हें इसके लिए जुड़ना होगा, अपने लोगों से, अपनी जनता से, अपना आप से और अपने कार्यकर्ताओं से। राहुल गांधी के कोर टीम के कई बड़े कांग्रेसी नेता उनके अहं को कांग्रेस के वयं से बड़ा बताते रहे हैं।
धर्मग्रंथों में अहंकार की चेतावनी
हर धर्मग्रंथ में अहंकार को, अना को गलत बताया गया है। कुरान की सूरह अननहल में लिखा है “वह अभिमान करने वालों को पसंद नहीं करता” – यानी जो अपनी दौलत, पद या काबिलियत के कारण दूसरों को नीचा समझता है, वह अल्लाह के नापसंद लोगों में है। पर कुर्सी चीज ही ऐसी है। सत्ता के लिए संसद की शुचिता को तार तार करने का क्रम इन दिनों बदस्तूर जारी है।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)
