इंजेक्शन या लापरवाही? रायबरेली CHC में मौत के बाद सिस्टम पर सवाल

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश के Raebareli जिले के शिवगढ़ इलाके में एक सरकारी अस्पताल अब सवालों के घेरे में है। पूरे टिकैत गांव की रहने वाली 55 वर्षीय राम प्यारी को तबीयत बिगड़ने पर परिजन सीएचसी शिवगढ़ लेकर पहुंचे। आरोप है कि यहाँ ट्रेनी फार्मासिस्ट ने इंजेक्शन लगाया और उसके कुछ ही देर बाद महिला की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल परिसर शोक से ज्यादा आक्रोश का मैदान बन गया।

इंजेक्शन के बाद मौत – आरोप गंभीर

परिजनों का साफ आरोप है, “ट्रेनी फार्मेसिस्ट के इंजेक्शन लगाने से मौत हुई।” घटना के बाद ट्रेनी फार्मेसिस्ट मौके से फरार हो गया। यहीं से शक और गहराया।

ग्रामीणों का कहना है, सरकारी अस्पतालों में प्रयोगशाला जनता है। ये लाइन भले कठोर लगे, लेकिन ground पर गुस्सा इसी तरह फूट रहा था।

अस्पताल का पक्ष – ‘बीपी हाई था, ऑक्सीजन कम थी’

सीएचसी अधीक्षक ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनके मुताबिक महिला जब अस्पताल आई थी, तब उसका ब्लड प्रेशर काफी हाई था और ऑक्सीजन लेवल भी कम था। उनका कहना है कि इंजेक्शन से मौत का आरोप तथ्यहीन है।

यहाँ कहानी दो हिस्सों में बंटी दिख रही है एक तरफ परिवार का आरोप, दूसरी तरफ प्रशासन का बचाव।

पुलिस की एंट्री और पोस्टमार्टम

हंगामे की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची। स्थिति संभाली गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। अब असली जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट देगी क्या यह मेडिकल इमरजेंसी थी? या प्रोटोकॉल की अनदेखी?

बड़ा सवाल- ट्रेनी सिस्टम क्यों?

ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की हकीकत यही है स्टाफ की कमी, ट्रेनी पर निर्भरता, और emergency में improvisation। अगर आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे सिस्टम पर उठेंगे। अगर आरोप गलत साबित होते हैं, तब भी trust deficit की खाई कम नहीं होगी।

सरकारी अस्पताल में इलाज भरोसे पर चलता है। जब वही भरोसा टूटे, तो मामला सिर्फ मेडिकल नहीं रहता — सामाजिक बन जाता है। इस वक्त भावनाएँ तेज हैं, लेकिन निष्कर्ष अभी दूर है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच ही तय करेगी कि मौत की असली वजह क्या थी। फिलहाल, शिवगढ़ में एक परिवार शोक में है… और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में।

खामेनेई गए, खामेनेई आए: Tehran में ताज बदला या सिस्टम वही?

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