राहुल गांधी का बयान—“विपक्ष क्यों नहीं मिल सकता?” पुतिन का भारत दौरा

अजमल शाह
अजमल शाह

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत पहुंचे हैं और दिल्ली इस समय एकदम “रेड कार्पेट मोड” में है।
जगह-जगह फ्लैक्स, वेलकम बोर्ड और ट्रैफिक पुलिस ऐसी मुस्तैद कि गुरुवार को रास्ते ढूंढना एक ब्रेन गेम बन गया।

यह दौरा इतना हाई-वैल्यू है कि इसे “राजनयिक वीकेंड ब्लॉकबस्टर” कहा जा सकता है।

23वां इंडिया-रूस समिट—8 बड़ी डील्स संभव

पुतिन इस बार 23वें भारत-रूस समिट में हिस्सा ले रहे हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों की रीढ़ माना जाता है। पुतिन अपने 7 टॉप मंत्रियों और करीबियों के साथ आए हैं, और माना जा रहा है कि लगभग 8 नई डील्स पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

संभावित मुद्दे –

  • क्रूड ऑयल सप्लाई मॉडल
  • S-400 मिसाइल सिस्टम से जुड़े बकाया चरण
  • India–Russia Free Trade Agreement (FTA)
  • रक्षा, पावर, फार्मा और टेक सेक्टर को लेकर नई रणनीति

संक्षेप में—“तेल भी, डिफेंस भी, और दोस्ती भी — सब पर बात होगी!

मीटिंग्स कैसे होंगी?—Hyderabad House डिप्लोमेसी

हैदराबाद हाउस में होने वाली बातचीत दो स्तरों में बांटी गई है— सिमित सदस्य वाली मीटिंग, जहां मोदी–पुतिन खुलकर बातचीत करेंगे। डेलिगेशन लेवल वार्ता, जहां दोनों देशों की टीमें फॉर्मल एग्रीमेंट पर काम करेंगी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन संयुक्त प्रेस बयान देंगे—और डिप्लोमेसी की शाम लंच + डिनर डिप्लोमेसी के नाम रहेगी।

दिल्ली में ट्रैफिक—“अगर मिला रास्ता तो किस्मत चमक गई!”

पुतिन के रूट को देखते हुए दिल्ली में कई जगह ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है—

  • NH-8
  • धौला-कुआं
  • दिल्ली कैंट
  • सरदार पटेल मार्ग
  • शांति पथ
  • इंडिया गेट – ITO – राजघाट का पूरा बेल्ट

दोपहर से शाम तक ड्राइव करना ऐसा लगेगा जैसे कोई रियलिटी शो का टास्क चल रहा हो—
“रास्ता ढूंढो और सेफली घर पहुंचो!”

RT India Channel Launch – मीडिया डिप्लोमेसी भी जोरों पर

दिलचस्प बात यह है कि पुतिन के सम्मान में होने वाले स्टेट डिनर के दौरान रूस अपने सरकारी मीडिया नेटवर्क RT का इंडिया वर्जन लॉन्च करेगा।
यानी कूटनीति के साथ-साथ मीडिया की एंट्री भी धूमधाम से!

राहुल गांधी का बयान—“विपक्ष क्यों नहीं मिल सकता?”

पुतिन की यात्रा पर विपक्ष ने भी सवाल उठाया है। राहुल गांधी ने कहा कि “विदेशी नेता आते हैं तो विपक्ष से मिलने क्यों नहीं दिया जाता? यह सरकार की असुरक्षा दिखाता है।”

कुल मिलाकर—डिप्लोमेसी ही नहीं, राजनीति भी बराबर की भागीदार बनी हुई है।

इतिहास भी जानिए—पुतिन की 10वीं भारत यात्रा

2000 से लेकर अब तक पुतिन कुल 10 बार भारत आ चुके हैं
इस दौरान— S-400 डील, परमाणु ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी, ब्रिक्स समिट जैसी कई अहम घटनाएं भारत–रूस संबंधों को मजबूत करती रही हैं।

Indo-Russian Friendship: अभी भी ON FIRE 

पुतिन का यह दौरा सिर्फ एक समिट नहीं, बल्कि ऊर्जा–डिफेंस–टेक–ट्रेड का एक कॉम्बो पैक है। अब देखना यह होगा कि दोनों देशों की दोस्ती आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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