
बिहार की राजधानी Patna से सामने आई एक घटना ने कानून, स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक साजिश नहीं बल्कि उस अंधेरे का आईना है जहाँ एक नाबालिग की जिंदगी को धोखे, लालच और अवैध मेडिकल सिस्टम के बीच फंसा दिया गया।
पुलिस के मुताबिक आरोप है कि एक युवक ने नाबालिग लड़की को प्रेम का झांसा देकर गर्भवती किया और फिर नवजात को बेचने की योजना बनाई।
प्यार के नाम पर रची गई खतरनाक साजिश
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी Rahul ने नाबालिग लड़की को अपने भरोसे में लिया। जब लड़की गर्भवती हुई तो मामले को छुपाने के बजाय आरोपी और उसकी मां Laxmi Devi ने खतरनाक योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक दोनों ने मिलकर नवजात को पालने के बजाय उसे बेचकर पैसे कमाने की योजना बनाई।
बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लिनिक में कराई गई डिलीवरी
जांच में सामने आया कि 2 मार्च को आरोपी लड़की को Sanjeevani Clinic लेकर गया। यह क्लिनिक बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा था। जानकारी के अनुसार पीड़िता सात महीने की गर्भवती थी, लेकिन वहीं प्रीमैच्योर डिलीवरी कराई गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि वहां कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं थी और डिलीवरी एक सर्जन ने कर दी।
पुलिस की कार्रवाई से टूटी साजिश
जब लड़की घर नहीं लौटी तो परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मोबाइल लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस टीम क्लिनिक तक पहुंची। पुलिस ने मौके से आरोपी राहुल, उसकी मां लक्ष्मी देवी और क्लिनिक संचालक Rakesh को गिरफ्तार कर लिया। तीनों को जेल भेज दिया गया है और मामले में कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

नवजात और पीड़िता की सुरक्षा
पुलिस के अनुसार पीड़िता फिलहाल बाल कल्याण समिति की देखरेख में है। जांच के तहत कोर्ट से नवजात के डीएनए टेस्ट की अनुमति भी मांगी गई है ताकि मामले के सबूत और मजबूत किए जा सकें। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह गिरोह पहले भी नवजात बच्चों की तस्करी जैसे मामलों में शामिल रहा है।
बड़ा सवाल: अवैध क्लिनिक कैसे चल रहे?
इस घटना ने एक और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। अगर क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन ही नहीं था, तो वह लंबे समय से कैसे संचालित हो रहा था? पुलिस अब अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाल रही है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
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