
Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल-ईस्ट की ऊर्जा सप्लाई को हिला दिया है। इसका सीधा असर Pakistan पर दिखने लगा है। तेल सप्लाई बाधित होते ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की असली हालत सामने आने लगी। हालात ऐसे हैं कि सरकार अब पेट्रोल बचाने के लिए वही उपाय निकाल रही है जो महामारी के समय अपनाए गए थे।
यानी कम यात्रा, ज्यादा ऑनलाइन जिंदगी।
सरकार का नया प्लान: घर से काम करो, तेल बचाओ
प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की सरकार अब सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने पर विचार कर रही है। आईटी और टेलीकॉम कंपनियों को कहा गया है कि कर्मचारी सप्ताह में कम से कम 2 दिन घर से काम करें। स्कूल और कॉलेजों में ऑनलाइन क्लासेज शुरू करने का प्रस्ताव। दफ्तर जाने वालों के लिए राइड-शेयरिंग सिस्टम को बढ़ावा। सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने की योजना।
सरकार की कोशिश साफ है तेल की खपत किसी भी तरह कम करनी है।
पाकिस्तान के पास कितना बचा है तेल?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब के मुताबिक देश के पास ऊर्जा का स्टॉक बेहद सीमित है। मौजूदा अनुमान पेट्रोल और डीजल लगभग 25 दिन का स्टॉक। क्रूड ऑयल करीब 10 दिन का रिजर्व। एलपीजी करीब 15 दिन की सप्लाई।
अगर सप्लाई जल्दी सामान्य नहीं हुई तो पाकिस्तान को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

सऊदी अरब से मदद की गुहार
संकट से बचने के लिए पाकिस्तान अब अपने पारंपरिक सहयोगी Saudi Arabia की तरफ देख रहा है। सरकार ने सऊदी अरब से अनुरोध किया है कि वह तेल सप्लाई को हॉर्मुज के बजाय लाल सागर मार्ग से भेजने की व्यवस्था करे। साथ ही पेट्रोल की जमाखोरी रोकने के लिए कीमतों की साप्ताहिक समीक्षा शुरू करने की योजना भी बनाई जा रही है।
कूटनीति की तल्खी और हकीकत
दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने बयान दिया था कि अगर सऊदी अरब पर हमला हुआ तो पाकिस्तान भी युद्ध में कूद सकता है। लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बता रही है। तेल सप्लाई रुकते ही पाकिस्तान की सरकार को पेट्रोल बचाने के लिए घर से काम कराने की नीति पर उतरना पड़ गया। “कूटनीति में तल्खी, लेकिन अर्थव्यवस्था में मजबूरी।”
हॉर्मुज संकट का बड़ा असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल सबसे ज्यादा दबाव उन देशों पर है जिनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है। और इस सूची में पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है।
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