
आज संसद का माहौल पूरी तरह से “ऑपरेशन सिंदूर” पर केंद्रित रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बहस की शुरुआत करते हुए कहा, “हम शांति के लिए हाथ बढ़ाना जानते हैं, तो शांति के लिए हाथ उखाड़ना भी जानते हैं।”
पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई
पहलगाम में हुए अमानवीय आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया। हमले में 25 निर्दोष नागरिकों की जान गई, जिसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया।
सेना का जवाब: 22 मिनट में तबाही
राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन महज 22 मिनट में अंजाम दिया गया। इस हमले में 100 से ज्यादा आतंकवादी, उनके ट्रेनर और मॉड्यूल संचालक मारे गए। लश्कर, जैश और हिजबुल जैसे संगठनों को बड़ा झटका लगा।
चकलाला से सरगोधा तक, एयरबेस पर हमले
भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के चकलाला, सरगोधा, रफीकी और रहीम यार खान जैसे अहम एयरबेस पर सटीक हमले किए। भारत की थलसेना और नौसेना भी इस ऑपरेशन में शामिल रहीं।
हमले का कारण और परिणाम
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह आत्मरक्षा में थी। पाकिस्तान ने 10 मई की रात भारत पर मिसाइलों और ड्रोन्स से हमला किया था, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे पूरी तरह नाकाम कर दिया।
पाकिस्तान की हार, DGMO ने मांगी माफी
राजनाथ सिंह ने कहा, “जब पाकिस्तान के DGMO ने संपर्क कर कहा – ‘महाराज बहुत हो गया, अब रोक दीजिए’, तब हमने ऑपरेशन रोका।” भारत ने सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर लिए थे।
रणनीति राम-हनुमान जैसी, नीति बुद्ध की
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी प्रवृत्ति बुद्ध की है, युद्ध की नहीं, लेकिन यदि कोई सीमा लांघे तो भारत निर्णायक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हमने ‘सुदर्शन चक्र’ उठा लिया है।
सेना के शौर्य को सलाम
राजनाथ सिंह ने संसद में कहा, “ये सिंदूर की लाली शौर्य की कहानी है।” उन्होंने वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के मस्तक पर वीरता की एक अमिट छाप छोड़ गया है।
पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भारत ने पाकिस्तान और पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया है – आतंकवाद का जवाब अब सीमा पार जाकर दिया जाएगा, और भारत अपनी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेगा।
शतक की जिद बनाम हैंडशेक: ओल्ड ट्रैफर्ड में गरमा गया मैच
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर को भारत ने किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं रोका, बल्कि अपने तय लक्ष्यों को पूरा करने के बाद ही रोकने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा,
“यह कहना कि हमने अमेरिका के दबाव में ऑपरेशन रोका, बिलकुल बेबुनियाद है।”
ट्रंप के दावे पर सधी हुई प्रतिक्रिया: ‘किससे बात हुई?’
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मीडिया बयान में दावा किया कि भारत और पाकिस्तान दोनों ने उनसे बात के बाद सीजफायर पर सहमति जताई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने किसी बाहरी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया।
ऑपरेशन सिंदूर: लक्ष्य पूरे, तब ही रोका गया एक्शन
राजनाथ सिंह ने संसद में साफ किया कि:
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ऑपरेशन के सभी रणनीतिक लक्ष्य पहले ही हासिल हो चुके थे।
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9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया गया।
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100+ आतंकवादियों को मार गिराया गया।
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भारतीय सेना को कोई क्षति नहीं पहुंची।
“हमने जो सोचा, उससे ज्यादा हासिल किया।”
सीजफायर का फैसला भारत का था, किसी और का नहीं
भारत ने 12 मई को पाकिस्तान के DGMO से बातचीत के बाद ऑपरेशन रोकने की घोषणा की। लेकिन ये निर्णय भारतीय सेना और राजनीतिक नेतृत्व का था, ट्रंप का नहीं।
राजनाथ सिंह ने कहा,
“हम अपने निर्णय सार्वभौमिकता और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लेते हैं, किसी राष्ट्रपति की कॉल पर नहीं।”

