“नीतीश नहीं तो हम क्यों?”—दिल्ली की राह पर CM, पटना में आंसू और नारे!

अजमल शाह
अजमल शाह

बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की खबर ने जेडीयू के भीतर भावनात्मक भूचाल ला दिया है। पार्टी नेता Rajeev Ranjan Patel मीडिया के सामने फूट-फूट कर रो पड़े। उनका दावा “कल बिहार में किसी ने होली नहीं मनाई। हजारों कार्यकर्ता रो रहे हैं।” यह बयान सिर्फ भावुकता नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बेचैनी का सार्वजनिक विस्फोट था।

“हमसे पूछा तक नहीं गया”

पटेल का दर्द साफ था, हमने वोट दिलाने के लिए जमीन पर काम किया, लेकिन इस फैसले से पहले कार्यकर्ताओं से पूछा तक नहीं गया। यह लाइन जेडीयू के ग्राउंड कैडर की उस बेचैनी को सामने लाती है, जो मान रही है कि दिल्ली की राजनीति पटना की नब्ज से कट रही है।

CM आवास के बाहर नारेबाजी

नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और दिल्ली शिफ्ट की खबरों के बीच मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन हुआ। कार्यकर्ता जमीन पर लेट-लेट कर विरोध जताते दिखे। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। CM आवास, JDU दफ्तर और BJP कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि “लीडरशिप ट्रांजिशन” के खिलाफ भावनात्मक रिएक्शन है।

नामांकन से पहले नीतीश की पोस्ट

राज्यसभा नामांकन से पहले नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा जताई। उनकी भाषा संयमित थी, लेकिन संदेश स्पष्ट वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं। बड़ा सवाल क्या यह स्वैच्छिक कदम है या गठबंधन की बड़ी रणनीति?

दूसरी तरफ BJP की तैयारी

इसी बीच BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin भी आज राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। नामांकन से पहले वे पटना के महावीर मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। उनका बयान—“बिहार मेरी जड़ है”—राजनीतिक संदेश से खाली नहीं है।

बिहार की सत्ता पर क्या असर?

अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो सबसे बड़ा सवाल बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन? राज्य की राजनीति में संभावित बदलाव की आहट है। गठबंधन समीकरण, जातीय संतुलन और 2026 की तैयारी सब कुछ इस एक फैसले से जुड़ता दिख रहा है। जेडीयू के अंदर की भावनात्मक प्रतिक्रिया बताती है कि यह सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता की मनोवैज्ञानिक शिफ्ट है।

दिल्ली की राह खुल रही है, पटना की सियासत कांप रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना अगर तय होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक युगांतकारी मोड़ साबित हो सकता है। अभी तस्वीर अधूरी है लेकिन आंसू, नारे और सुरक्षा घेरा बता रहे हैं कि मामला साधारण नहीं।

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